🌷रामजी – गजल🌷

मत दे इतरा धता रामजी!
मिनख मिल़ै तो बता रामजी!!
लोकतंत्र में लूखो, भूखो!
जन तो खावै खता रामजी!!
मिनख !, मिनख नै जाति पूछै!
जूत चेपनै सता रामजी!!
वोट मांगिया पैर पकड़नै!
अब तो मालक छता रामजी!!
धर्म धजा फरकावै ऊंची!
करर्या कुकर्म कता रामजी!!
देख विगोयो भाईचारो!
भेल़प गंगा घता रामजी!!
गुड़ मिरकी सूं राजी कीना!
कीरप पीढ्या जता रामजी!!
देवै रीझ थथूबा चोखा!
मसल़ काम में तता रामजी!!
ज्यांरो राज !लेवै ई ज्यांरा!
जनतंत्र तो लता रामजी!!
थारी माया तुंही जाणै!
पूजीजै बेपता रामजी!!
छल़िया देव ! पुजारी छल़िया!
पल-पल बदल़ै मता रामजी!!
ठग बैठा ठकराई थापै!
जिता चोखल़ै हता रामजी!!
खोसो, खावो ! रोसो, मोसो!
पढिया अजतक अता रामजी!!
स्नेह, प्रेम अपणायत गमगी!
लाधण रा दे पता रामजी!!
~~गिरधरदान रतनू दासोड़ी

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