रंग धर मोखांराय रमै

तेमडाराय

मूंजासर रै वीठू नगराजजी रै नेम हो कै वै हर चानणी सातम रा जैसलमेर स्थित तेमड़ै थान रा दरसण करण जावता। नगराजजी प्रसिद्ध कवि बोहड़जी वीठू रै भाई हरदानजी रा बेटा अर प्रसिद्ध कवि सूजा बीठू रा पिताजी हा।

बोहड़जी उण सदी रै दिग्गज कवियां में शुमार हा। जिणां रै ई तेमड़ाराय रो अथाह इष्ट हो। महावीर दूदाजी जसहड़ोत री काव्यमय समस्या पूर्ति करण रो जस बोहड़जी नै जावै। आ बात कविराजा बांकीदासजी आपरी ख्यात में अंगेजी है-“एक ओल़ी जैसल़मेर रै रावल़ कही अर बाकी दूहो तेमड़ाराय रै इष्ट सूं साठीका रा वीठू बोहड़ पूरो कियो।”

इण प्रतापी घराणै में नगराजजी रो जनम हुयो। नगराजजी रै सूजाजी जैड़ा सपूत हुया। सूजाजी वीठू वो नाम हैं जिणांनै बीकानेर रो गौरव ग्रंथ ‘राव जैतसी रो छंद’ रचण रो जस जावै।

कह्यो जावै कै प्रौढावस्था में नगराजजी री जोड़ायत रो सुरगवास हुयग्यो। एक दिन उणां रै रोटी में दही लेवण री जचगी पण बेटे री बहुआरी नटगी कै दही है ही नीं। जोग सूं जद उणां रो बेटो जीमै हो तो उणां देखियो कै उणरी थाल़ी में दही है। उणां उणी बखत खण ले लियो कै पाछी रोटी परणीज’र ई खावूंलो। खुद री ढल़ती ऊमर अर मोटयारमाल बेटा! ऐड़ै में नगराजजी नै बेटी कुण देवै? सेवट पाखती रै ई गांम मुरीदसर रा मुरीदजी दधवाड़िया कह्यो कै- “बेटी तो हूं दे दूं पण म्हारी ई एक शर्त है।”

लोगां पूछियो कै बतावो- “कांई शर्त है थांरी ?”

आ सुण’र मुरीदजी कह्यो कै- “मूंजासर गांम री पूरी पांती सूजो छोडै अर पूरी पांती म्हारी बेटी री हुवण वाल़ी संतान री हुवै। इणमें सूजो कै सूजै री ऐल़ किणीभांत री दखल नीं देवण री तलाक लेवै तो म्हैं म्हारी बेटी नगराजजी नै दी।”

सूजैजी तलाक ली अर कह्यो कै- “म्हैं आज ई मूंजासर छोड दूंला। म्हारा जाया पांती कै बसण रै मिस पाछा मूंजासर नीं आवैला।”

मूरीदजी आपरी बेटी नगराजजी नै परणा दी।

नगराजजी तेमड़ै जावण रो नेम खंडियो नीं। आखिर बूढापो आयो तो ई डोकरै नेम नीं छोडियो। सेवट डोकरी साक्षात दरसण दिया अर कह्यो “बेटा हमें तूं आगै सूं अठै मत आई। हूं खुद थारै सागै हाल’र उठै ई रैवूंली अर वो दूजो छोटो तेमड़ो बाजैला पण तूं जठै लारै जोवैला, हूं उठै ई थंब जावूंली।” डोकरी, नगराजजी नै कह्यो कै- “तूं हाल हूं थारै मोरै बैय रैयी हूं।”

ठेठ आपरी कांकड़ में बड़तां नगराजजी रो जी साच नीं दियो कर वां लारै जोयो। जोवतां ई आवाज आई “बस नगा ! अठै ई थान थाप। इयै सूं आगै नीं हालूं।”

नगराजजी मूंजासर री कांकड़ में तेमड़ाराय रो थान थापिय़ो। जिको आज मोखां री(बीकानेर) कांकड़ में स्थित है अर ‘दूजो तेमड़ो’ बाजै। ऐड़ी मानता है कै भलांई उण तेमड़ै रा दरसण करो भलांई इणरा। फल़ एकदम बरोबर है।

मगरै री इण पावन भोम में विराजण वाल़ी भगवती तेमड़ाराय रा छंद आपरी निजर करूं-

।।दूहा।।
जाहर मोखां जोगणी, थपियो जंगल़ थान।
दुनी तेमड़ो दूसरो, राजै राजस्थान।।1
सुकल़ पखै हर सप्तमी, उतरै भल आकाश।
अवनी मोखां आवड़ा, रचणी आई रास।।2

।।छंद – रेंणकी।।
जोगण दल़ प्रबल़ सबल़ मिल़ झूलर, रिल़मिल़ वल़वल़ उतर रही।
वसुधर थल़ विमल़ विछायत वैकल़, थिरचक मंगल़ जँगल़ थही।
भल़हल़ नग हीर चीर वर भल़कत, जुथ हद मुल़कत आय जमै।
मगरै गिरराय सदल़ रल़ गहरी, रंग धर मोखां रास रमै।
जियै रंग धर मोखांराय रमै।।3
दमदम दमकार नूर मुख दमकत, सांप्रत चमकत सूर सही।
झमझम झणकार झांझरां झमकत, ठमकत नेवर पाव ठही।
ढमकत ढम ढोल बोल बज ढोलक, घमकत घमकत नाच घमै।
मगरै गिरराय सदल़ रल़ गहरी, रंग धर मोखां रास रमै।
जियै रंग धर मोखांराय रमै।।4
भणणण भणकार भैरिय भूंगल़, गणण गूघर घमक घुरै।
तणणण तद बाज साज उथ तुरही, खणणण सद खड़ताल़ खरै।
झणणण झींझ मधुर सुर झणणण, रणणण वन रणकार रमै।
मगरै गिरराय सदल़ रल़ गहरी, रंग धर मोखां रास रमै।
जियै रंग धर मोखांराय रमै।।5
हड़हड़ मुख हास रास सुख हासत, झड़झड़ भासत फूल झरै।
सड़़ड़़ड़ कर डाव घूम भल सड़ड़ड़, करतल तड़तड़ उरड़ करै।
फड़फड़ तन उडत साड़िये फाबत, अड़बड़ चौसठ सरड़ अमै।
मगरै गिरराय सदल़ रल़ गहरी, रंग धर मोखां रास रमै।
जियै रंग धर मोखांराय रमै।।6
डमडम डमकार अवन झट डोलत, कमकम जद किलकार करी।
धमधम धमकार धूजियै धरणी, खमखम पड़ खमकार खरी।
हमहम हमकार चहुंवल़ हूंकल़, घमक गई गयणाग घमै।
मगरै गिरराय सदल़ रल़ गहरी, रंग धर मोखां रास रमै।
जियै रंग धर मोखांराय रमै।।7
धररर धसक्क ससक्क धरधारण, करर कसक कमठाण करै।
अररर विडक्क सिरक दंत अवनी, डररर सूअर धड़क डरै।
फररर फिरत देत फट्ट फरगट्ट, थररर तीनां सास थमै।
मगरै गिरराय सदल़ रल़ गहरी, रंग धर मोखां रास रमै।
जियै रंग धर मोखांराय रमै।।8
मगरै महमाय जाल़िया जूनी, कैर कूमटा रखत कनै।
मुरधर मेवाड़ माल़वै मालम, महियल़ पूरी माड मनै।
जंगल़ में बियो तेमड़ो जाहर, नितप्रत गिरधरदान नमै।
मगरै गिरराय सदल़ रल़ गहरी, रंग धर मोखां रास रमै।
जियै रंग धर मोखांराय रमै।।9

।।कवत्त।।
महि मगरे महमाय, उतर दल़ उरड़ आकाशां।
महि मगरै महमाय, रीझ रमणी जिथ रासां।
महि मगरै महमाय, मुदै ओ थानंग मोटो।
महि मगरै महमाय, ताकवां भंजण तोटो।
सुरराय रास रमणी सदा, हितवां करण हुलास रै।
सुकवियां बात साखी सुणी, दाखी गिरधर दास रै।।10

~~गिरधरदान रतनू दासोड़ी

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