रंग रै राजस्थान

माण काज मरणो मँडै ,जँग हद जुड़ै जवान।
रजवट रीत रुखाल़णा, रंग रै राजस्थान।।1

कटै वीर धर कारणै ,प्रण सटै दे प्रान।
ऐड़ा नर उपनै अठै ,रंग रै राजस्थान।।2

नर नेकी चूकै नही, जद तद एक जबान।
देखी इण दुनियाण मे,रंग धर राजस्थान।।3

मरण परण सम भाव मन ,सधर रखै निज सान।
दाखै जस सारी दुनी ,रंग रै राजस्थान।।4

अबल़ा नी नारी अठै ,सबल़ रखै स्वाभिमान।
फतै पताका फरहरै रंग रै राजस्थान।।5

छंद – रेंणकी
मन इक रीते परण मरण मन, उवा धरण है देख इया।
मरिया पग रोप राड़ बिच माणस, जीवट उर में राख जिया।
सोभा इण भांत सांभल़ी सुरपत, ऐरावत चढ जात अयो।
सुरधर समराथ अनै मुरधर सतजग पर समवड़ रूप जयो।।१

पेखो इम वीर धर प्रण पाल़ण, सत पख चाढण नीर सदा।
ऊनी हद खीर दहै कर उणमे, जुड़ै भीर ना होय जुदा।
भांजण सो भीड़ अबल़ पख भिड़ियां, पीड़ निजु नह सोच पयो।।
सुरधर समराथ अनै मुरधर सतजग पर समवड़ रूप जयो।।२

सरणागत सटै सीस दे सूरा, फिर पाछा नहीं वचन फुरै।
धर पर अमर नाम रा धाका, घण डाका जस जाप घुरै।
लाखां मुख निडर कीरती लाटण, दाटण अरियण प्राण दयो।
सुरधर समराथ अनै मुरधर सतजग पर समवड़ रूप जयो।।३

दिल रा दरियाव भाव रा भूखा,राव रंक नह भेद रखै।
जूझै कर चाव दुकाल़ां जोधा,निमख डाव नह हेठ नखै।
सत री चढ नाव बहै इम सतवट,रजवट थिरचक उरां रयो।
सुरधर समराथ अनै मुरधर सतजग पर समवड़ रूप जयो।।४

बांठां बांठां कज सीस बढ्या,कर रीस चढ्या अस क्रोधाल़ा
बातां बह ढल़ती रात विमल़,ख्यातां वै राची रत खाल़ां
साची जग आज भरै इम साखां,भाखां मन में मोद भयो
सुरधर समराथ अनै मुरधर सतजग पर समवड़ रूप जयो।।५

अबल़ा नाम नार नी अवनी,सार बात संसार सिरै।
छेड़्यां विकराल़ काल़ जिम छेवट,कामण नागण रूप करै।
डसिया इणभांत अनेकुं दसिया.गुण गीतां दुनियाण गयो।
सुरधर समराथ अनै मुरधर सतजग पर समवड़ रूप जयो।।६,

प्रीतम सूं प्रीत रीत रजवट,सिर हाडी रख थाल़ सँपै।
झूली सतझाल़ पदमणी जौहर,केवी पोहर आठ कँपै।
प्रगटी धर माथ धाय पन्ना सी,थँभ कीरत जिण नाम थयो।
सुरधर समराथ अनै मुरधर सतजग पर समवड़ रूप जयो।।७

जीवत ही पीर धीर जोगापण,धिन घूंटी परताप धरा।
वसुधा वरियाम माम सूं मंडी,सरबालै कथ सुणी सरा
महिमा संभल़ विमल़ मुरधर री,कवियण गिरधर छंद कयो।
सुरधर समराथ अनै मुरधर सतजग पर समवड़ रूप जयो।।८

~~गिरधरदान रतनू दासोड़ी

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