रंगमाल़ सूं कीं दूहा

Vishnu_Avatars

विघन विडारण वड वदन, अपण सदन उछरंग।
आद गणेशा आपनैं, रेणव आखै रंग।।1
कारज सिग करणो कठण, हरणो विघन हमेस।
इण कारण ईसर तणा, गहरा रंग खणेस।।
आद सुजस आखै इटल़, साच मनां कव सेव।
वीण धरण हंस वाहणी, सरसत रंग सदैव।।
इल़ किवल़ासा ऊपरै, इटल़ रहै उछरंग।
गण नाचै देवै गहर, रंग भूतेसर रंग।।
चोल़ कियो चख तीसरो, उथल़ दियो अनंग।
संत मनोरथ साजणा, रंग धव गिरजा रंग।।
कर निज घोटै कंतरै, भल गवरा आ भंग।
राल़ गल़ै हद रीझणा, रंग भूतैसर रंग।।
मधु कैटब भांजै मुरड़, पखै संत प्रतपाल़।
तनै कंत लिछमी तणा, दाखां रंग दयाल़।।
हिरणाकुश हणियो हत्थां, नरहर बणियो नाथ।
संत रुखाल़्यो सबल़पण, साचा रँग समराथ।।
स़िधव री करुणा संभल़, अयो उपाल़ो दौड़।।
गज तार्यो मार्यो ग्राह, रंग तनै रणछोड़।।
छत्री कीना छत्र बिन, सूरां हीण समाज।
फरस धरण फरसा तनै, दखां रंग द्विजराज।।
असुर उपापण तूं अडर, सुरगण करण सनाथ।
दुनी सारै दे आजदिन, रंग तनै रघुनाथ।।
खर दूसण खल़काविया, समर मांय समराथ।
अमर गलां इल़ ऊपरै, रंग तनै रघुनाथ।।
राण कुंभै सा भड़ यिपु, भिड़ भांजै भाराथ।
दान विभीखण लंक दी, रंग तनै रघुनाथ।।
मेघनाथ हद मुरड़ियो, ताता बाया तीर।
तनै रंग दसरथ तणा, व्हाला लिछमण वीर।।
भात भर्यो नरसी भुवन, प्रीत पुराणी पाल़।
बात बहै वसुधा विमल़, रंग तनै रिछपाल़।।
तो दीठां भाजै तिमर, इल़ पर हुवै उजास।
सो जन रोजी सांपणा, भला रंग तो भास।।
परम धरम अहिंसा पुनी, तन रा सह सुख त्याग।
मन निरमल़ महावीर नै, भणां रंग घण भाग।।
सांपण जीवां सरब सुख, भगवन बणियो भीर।
पह बदल़ण मन पापियां, महि रंग महावीर।।
हिंसा भाव हरणो हिंया, साच करण मन सुद्ध।
पतित उद्धारण पर हितु, वसु हुवो रंग बुद्ध।।
असुर उपाथण तूं अडर, अगनी धारण अंग।
लंक जल़ावण लंगड़ा, रंग हो हड़मंत रंग।।
स्हायक बण सुग्रीव रो, पायक रघुवर पूर।
अहिरावण उथाल़ियो, सांप्रत रंग है सूर।।

~~छंदां री छौल़ – गिरधरदान रतनू “दासोड़ी”

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