🌺रयत रा रूखवाला🌺 – कवि भंवरदान मधुकर माड़व

।।दोहा।।
कुटै असुर काढिया, हिन्द सेना कर हाक।
भगा पीठ दे भाड़िया, धन शूरो तब धाक।।

।।छन्द त्रिभंगी।।
धन, धन हद शूरा, अडग अरूरा, भारत भूरा, बल पूरा।
हाकल कढ हूरा, जोध जरूरा, हिन्द हजूरा, जंग जूरा।
दुष्टी कर दूरा, गंज गरूरा, रखण सबूरा, रूढियाला।
रयत रखवाला, आव अंताला, भारत वाला, भुरजाला।
जिये राजस्थानी, रखवाला।।

हिन्द सेना हाली, राज रूखाली, पैदल चाली, रणताली।
घुसपेटो घाली, पाक पंपाली, सेन सम्भाली, संगराली।
झूठा अरू जाली, खिसक्या खाली, करे कुपाली कंजराला।
रयत रखवाला, आव अंताला, भारत वाला, भुरजाला।
जिये राजस्थानी रखवाला।।

छल छंदी छाया, कपट कमाया, कब्जा ठाया, घूस आया।
ले धूस लुटाया, लश्कर लाया, मूर्ख जाया, मद माया।
ऊंधी मत आया, देश दबाया, लोभ अधाया, लटकाला।
रयत रखवाला, आव अंताला, भारत वाला, भुरजाला।
जिये राजस्थानी रखवाला।।

जननी रा जोधा, कर कर क्रोधा, शत्रु शोधा, यश योधा।
गाज्या जद गोधा, खिस्क्या खोधा, बूझदिल बोधा, मुख मोधा।
हिल्क्या उण होधा, पीठ पयोधा, भिड़ ग्याह जोधा भमराला।
रयत रखवाला, आव अंताला, भारत वाला, भुरजाला।
जिये राजस्थानी रखवाला।।

तोफो रा टोला, गुंजे गोला, हुवा हबोला, रमझोला।
बौफर कर बोला, झीक झबौला, डूगर दौला, खंच खौला।
उड़ ग्याह तप औला, पड़ ग्याह पौला, पाक घसौला, पंगराला।
रयत रखवाला, आव अंताला, भारत वाला, भुरजाला।
जिये राजस्थानी रखवाला।।

गनो हद गाजी, बेरण बांजी, जुड़या जहाजी, जंग ताजी।
पड़ पाक अकाजी, सुरगों साजी, होय अवाजी, हा हा जी।
रांगड़ हुआ राजी, पूरा पाजी, चमक्या काजी, चमराला।
रयत रखवाला, आव अंताला, भारत वाला, भुरजाला।
जिये राजस्थानी रखवाला।।

कश्मीर कमाला, जोध जमाला, हुआ हमाला, हद वाला।
करके मुख काला, काढ देवाला, नाठा पांला, नखराला।
ठर के ग्याह ठाला, अजरख आला, चंदा चाला, चिरताला।
रयत रखवाला, आव अंताला, भारत वाला, भुरजाला।
जिये राजस्थानी रखवाला।।

कर पाक अनीती, भारत भीती, विदेश नीती, अंत विती।
प्रलाप पलिती, छल कर छिती, मूर्ख मिती, मन चिती।
कारगिल सू क्रिती, राजन रिती, युद्ब कर जिती, जोराला।
रयत रखवाला, आव अंताला, भारत वाला, भुरजाला
जिये राजस्थानी रखवाला।।

कश्मीर कहानी, शूर सुजानी, जंग जितानी जग जानी।
हरखत हर प्राणी, गर्व गुमानी, देख जवानी, दहलानी।
बोले कव बाँणी, भंमर बखानी, दै कुर्बानी दिलवाला।
रयत रखवाला, आव अंताला, भारत वाला, भुरजाला।
जिये राजस्थानी रखवाला।।

।।छप्पय।।
रयत रा रखवाल, भड़ ऊभा भुरजाला।
रयत रा रखवाल, केहरी वासगं काला।
रयत रा रखवाल अवन पर करण ऊँजाला।
रयत रा रखवाल भिड़या जोधा भंमराला।
रयत रा रखवाल रंग, ऊभा बाँर्डर ऊपरे।
धनवाद दे शूरा धरण, कव भमरो वर्णन करे।।

~~कवि भंवरदान मधुकर माड़व

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