ऋतू वर्णन – त्रिकुटबंध गीत – डॉ.शक्तिदान कविया (सस्वर)

।।दोहा।।
मौसम तीनां रुत मुगट, प्रगट तिंवारां प्रीत।
च्यार दुहाळां थट चवूं, गहर त्रिकुटबंध गीत।।

।।त्रिकुटबंध गीत।।
धिन विमळ ऊजळ धोरिया,
मुधरा स बोलै मोरिया,
कोरिया कुदरत खांत करनै, भांत-भांत भराव।
वड गयण घमकै वादळा,
वीजळी चमकै चहुंवळा,
चहुंवळ पळळ वीजळ चपळ,
कांठळ सजळ झळ कळ क्रगळ
बादळ विटळ टळ दळ बदळ,
खळ-खळ प्रबळ जळ खाळ खळ
परनाळ ढळ भळ पैंपरळ,
गळ ढगळ रळ बाखळ गुडळ
परमळ विमळ थळ वळ प्रघळ,
सांभळ सकळ इळ पुळ सफळ चळ अचळ मंगळ चाव।।1।।

मौसम सियाळै थळ मही,
कुळ ठंड हेमाळै कही,
भाखला कांबळ पटू भाळै, विचाळै मरुवाट।
रठ पड़ै तप मुख हरि रटै,
चठ चिलम ओटै चौहटै,
पट निपट चौहट हट प्रगट,
सी रठ विकट तप निकट सट
महि कमठ वट चट खट सिमट,
घर घरट कूवट अरट घट
कूमट मुरट छज बुहट कट,
गघहट खिजट गोहट गरट
पणघट सुघट झटपट पलट,
गैघट गहट दधमट घुमट थट इमट थळवट थाट।।2।।

अरड़ाट ऊठै आंधियां,
वित रहै मुसकल बांधियां,
रांधियां जीमण भिळै रेती, धसळ देती धूप।
इखियात ऊनाळै इसी,
तप-भोम सिध भाळै तिसी,
तिड़ भुंयड़ पड़ तावड़ तकड़,
अंधड़ उपड़ पतझड़ अचड़
वड़ झंखड़ रूंखड़ गुड़ बड़ड़,
एवड़ उमड़ अड़बड़ उरड़
खेजड़ सुरड़ चड़ तड़ खखड़,
दीवड़ कंधड़ मुख नड़ दुझड़
घड़ टिकड़ चोपड़ घी घरड़,
ऊजड़ पंथड़ खड़ भड़ अनड़ रड़वड़त रांगड़ रूप।।3।।

चहुंदिस जमांनै चाव में,
भल इष्ट साचै भाव में,
मेळा सुरंगा थळी मंडै, रळी करत हरेक।
ओठा स झुरकै आवतां,
मगरियै धूम मचावतां,
भर निजर धर अंबर भंवर,
झंगर सिखर गिर निरझरर
ईसर गवर मिंदर अगर,
फरहर धजर तर हर फिकर
गेहर घुमर घर-घर गहर,
मधकर लहर सरवर मुकर
सुर सिमर उर अंचर सधर,
जमधर कमर किरमर जबर नर हुनर मुरधर नेक।।4।।

~~डॉ.शक्तिदान कविया

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