साच माग लीजिए

परे रहेंगे मकान व दुकान सारी यहां,
सावधानी मनमानी काम नहीं आएगी।
कारखाने व खजाने जड़े ही रहेंगे मीत,
माया संची जो तो तेरे अर्थ कछु नाएगी।
खड़े ही रहेंगे अश्व रथ गज शाला बीच,
आ काया भाई उभै बांसन में समाएगी।
अच्छे काम किए है तो बात एक सत्य मनो,
कछु ना रहेगो गीध याद रह जाएगी!!

परहरे साच परनिंदा हूं को पाप भाई ,
कूड़ की कमाई दिस ध्यान मत दीजिए।
जार हूं को यार तूं तो भूल से बनाए मत ,
सुरा हूं को पान मिंत कबू नही कीजिए।
स्नेही की सार लेय देय सनमान बहुल,
धूतन व दूतन की बात मत रीझिये।
अंखन में लज रख कूड़ की हूं धजा तज,
गीध एक सीध भाई साच माग लीजिए।।

~~गिरधरदान रतनू दासोड़ी

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