संवेदना रो प्रवाह!!

आज आपां अपणै आप नै आधुनिक कै विचारवान कैवण में अंकै ई नीं संकीजां पण जद कोई आपांनै पूछै कै आप में संवेदना जीवती है!!तो आपां छ दांत र मूंडो पोलो री गत में ज्यावां। ज्यूं-ज्यूं आपां आधुनिकता रो आवरण ओढण लागा बिंया-बिंया आपां में असंवेदनशीलता पग पसारण लागी। जद ई तो आपां रै पाड़ौस में एक कानी लास माथै कूका रोल़ो मचियोड़ो है तो दूजै कानी उणी लास माथै लोग आपरी रोट्यां सैकण में लागोड़ा है अर आपां बीच में कदै ई इनै मूंडो बताय भला बजां तो कदै ई बिनै मूंडो बताय चातरक बजां!!पण पैला लोगां री कैणी अर रैणी एक सरीखी होती। दूजै रै दुख में दुखी होवणो अर दूजै रै सुख मे सुखी होवणो उणां री आदत रो एक भाग हो, जिणनै छोडणो वे आपरो अभाग मानता। ऐड़ो ई एक किस्सो है चोवटियां जोश्यां रै होल़ी नीं मनावण रो।

मध्यकालीन डिंगल़ कवि मयारामजी सिंढायच जिकै माड़वै गांम रा ईज हा, रा ऐ आखर आज ई लोकमुख माथै अवस्थित है–

मिल़ै गांम माड़वो, जनम चारण कै जोशी !
बार ओठा घर बंध, पोकरणा पाड़ोसी!!
अर्थात माड़वै जैड़ो गांम उणमें ई जनम चारण कै जोशी रै घरै होवणो अर घर रै बारै ऊंठ बांधण री मजबूरी रै पछै पोकरणां जैड़ा पाडौसी मिलण नै कवि राम रूठण रो फल़ मानियो है।

अठारवीं सदी में माड़वै में जोशी (पुस्करणां री एक शाखा) रा लगैटगै चाल़ीस घर हा तो चारणां रा तो घणा घर हा। माड़वै गांम में जद जोशियां रा मोकल़ा घर होता पण आज उठै एक ई जोशी परिवार नीं है, है तो फगत लालां री एक देवल़ी !जिकी एकांत ओरण में सदियां सूं मातृ ममता री कथा आपरै अंतस में लियां अड़ीखंभ ऊभी इण बात री साखीधर है कै कदै ई अठै जोशी बसता अर उणां री विद्वता अर जोगतापणै री धाक चोखल़ै में ही।

अठारवें सइकै में अठै एक हरखजी जोशी रैया करता। जिणां रो ब्याव गांम मलार रै वोहरां रै अठै होयो। उणांरी जोड़ायत रो नाम लालां वोहरी हो।

वि.सं. 1752 फागण री पूनम रै दिन पूरो गांम होल़ी रो तिंवार मनावण अर होल़ी मंगल़ावण में मगन हो। उण बखत कुजोग सूं हरखजी रो बेटो भागचंद मंगलीजती होल़ी री कराल़ झाल़ां री चपेट में आयग्यो। लोगां काढियो जितै-जितै टाबरियो दुसल़ीझग्यो अर बचियो नीं।

गांम में धैकार फूटग्यो कै जोशियां रो नानकियो होल़ी री झाल़ां में आयो अर पाछो होयग्यो(मर गया)। ज्यूं ई ममता री मूरत लालां नैं इण दुखद बात री ठाह पड़ी तो वा खुद ई पुत्र री पार्थिव देह साथै अगनी री झाल़ां में प्रविष्ट होयगी।

इण हृदय विदारक घटना रै विषय में गांम अर आसै-पासै पतो पड़ियो तो उण दिन पूरै गांम में सीधो (भोजन) रंध्योड़ो ईज रैयो, किणी नख ई नीचो नीं कियो।

पण समूल़ै चोवटियै जोशियां इण होल़ी रै दिन नै सोग रो दिवस घोषित कर दियो। समाज रै संवेदना री व्यापकता देखो कै माड़वै गांम रा ई नीं, चोवटिया जोशी भारत में कै पाकिस्तान रै किणी पण खूणै में कठै ई रैवता होसी पण संवेदना नै अजै रुखाल़ै अर इण होल़ी रै दिन नैं सोग रो दिन ई मानै।

कालांतर में माड़वो जोशियां छोड दियो अर लालां रा वंशज जठै-जठै रतनुवां (चारण) कै सेवड़ां (राजपुरोहित) रा गांम हा, उठै-उठै इणां री जजमानी रै कारण जा बस्या पण सामाजिक प्रतिबद्धता अर सामूहिक संवेदना नै रुखालण री आखड़ी(प्रण)सूं तिल मात ई नीं डिगिया। आज ई होल़ी नै समूल़ा चोवटिया जोशी सोग रो दिन मानै।

नमन समूल़ै समाज री संवेदना नै।

~~गिरधरदान रतनू “दासोड़ी”

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