सरस्वती आवाहन

MataSaraswati

🌸दोहा🌸
कर्ण फूल धर कमल रा, कमल विमल शुभ हार।
कमल कमल मन पद्मजा, विमल भाव विस्तार।।१
ह्रदय-कमल-मम-चाखडी, चरण कमल तव चारु।
जननी धारण कर गिरा, धूल पाँव दूं झारु।।२
विमला, वीणा-वादिनी, मान मात मनुहार।
झंकृत कर दे जोगणी, ह्रद तंत्री रा तार।।३

🌸छंद अडिल्ल🌸
विमल देह वाणी ब्रह्माणी,
सादर आव अठै सुर राणी।
लय छंदों री करवा ल्हाणी,
वसौ कंठ मां वीणा पाणी।।१

धवल कमल धारण धणियांणी।
कविता कारण कंबुज पाणि।।
रसा !रसन आसन पर राजौ।
वीणा तार सितार बजाजौ। २

आनन पूनम चंद अनुपम।
करती आभा मन रो तम कम।
आई वाणी आभ कपाल़ी।
सिर पर पर बिंदी सेत निराल़ी। ३

आँखडियां काल़ी अणियाल़ी।
कृपा निझरण तौ करुणाली।
नरपत नित प्रत रहै निहाल़ी।
वंदन वाणी वीस भुजाल़ी।।४

नक बेसर नाकां नथ नामी।
भवा, भैरवी, स्वरा, भजामी।।
करण फूल कनकं कर धारण।
सदा आव मन तिमिर संहारण।।५

सेत पुष्प जुत सुंदर वाल़ी।
लटा वासुकी नागण भाल़ी।
बैठ लहरती वपु वड डाली।
धवल कांचल़ी धर कमलाल़ी।।६

हाटक हीरक हार हिया में।
फटिक रत्न फबता शुभ जा में।
हेम हांसली है मन हारी।
मणिमय जिणपर मीनाकारी।।७

कंठाभरण, कनक सुभ तन पर।
रसा!शारदा रूप मनोहर।।
मोती री लड सुंदर नामी।
गल़ धर तिमणियौ हंसगामी।।८

कर शुचि कंकण वलयाकारा।
रसा! दांत करि चूड शुभ धारा।
झणण झणण झण बीण बजंती।
तिरकिट तुम तत नाच करंती। ९

वरदा हाथ एक ले वेदा।
स्वरदा माल करा शुचि जयदा।
कमले शुभ्र कमल कर पाणि।
रीझ रीझ माता सुर राणी। १०

कटि किंकणि धुनि ह्वै कमनीयं।
रुण झुण रुण झुण रव रमणीयं।
अनहद नाद बजंत अपारा।
सुरसत रेलावै सुर धारा। ११

उत्तरीय शुभ धवल अंग धर।
कंचुकि धवला कमल मनोहर।
पद छम छम छम छम धुनि पायल,
रम झम ऱम झम रव रासायन।।१२

मन मराल पर बैठर माता।
आखर भाव दयौ अवदाता।।
चरण कमल, रो चाकर कीजो।
गिरा ग्यान, कविता गुण दीजौ।।१३

नरपत दान निपट नादानम्।
गिरा आप कीजौ गुणवानम्।
बालक अवगुण बगस भवानी।
जय जय जोगण जय जग राणी।।१४

स्वर दे !वरदे!लय दे सुमति।
जय दे!गय दे!हय दे!जयति।
जयति जयति जय वीणापाणी।
कृपा अहरनिश कर कल्यांणी।।१५

🌹कलछप्पय🌹
जय शारद जगदंब, भैरवी, रसा, भारती।
कवि -कुल-कृपा कदंब, उतारूं, गिरा, आरती।
चंदन चर्चित भाल, व्याल सम केश मनोहर।
सिंदुर अर्चित गात, सुखद पंचम स्वर सुंदर।।
जगदंब अंब अनुनय जया, वरा! मरालं वाहिनी।
स्वर नाद छंद लय साम दे, “नरपत”ने वरदायिनी।।१

🌹दोहा🌹
चंदन चर्चित चारणी, सिंदुर अर्चित गात।
रसन कमल पर रास नित, रमों मांन नवरात।।१
जयति जयति जगदंबिका, सदा रहौ शिशु साथ।
बीस भुजी वरदायिनी, स्वरदायी साक्षात।।२

~~©वैतालिक

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