सैणां इम काम सबां सूं सोरो

Bhashan

।।गीत जांगड़ो।।
(वर्तमान री विद्रूपतावां माथै)

सैणां इम काम सबां सूं सोरो,
झांसां भासण झाड़ो।
भोल़ां नुं भटकाय भावां में
कमतर सहल कबाड़ो।।1

दो उपदेस दूजां नैं दाटक
सरसज बात सुहाणी।
मनमाफक बेवो खुद मारग
केवो काग कहाणी।।2

रस राखो संतां जिम रसना
भूल बुरो मत भाखो।
जन नैं नांख जीब रै जाल़ां
चावो सो फल़ चाखो।।3

वीरा! सहल सुधारक बणणो
अहल रती नह आवै।
पहल करो बातां परमारथ
चुतर सुवारथ चावै!।।4

जोय समाज समस्या जूझै
गब चढ मंचां ग्यानी।
आंसूं राल़ मगर जिम आंख्यां
ध्यान श्रोतां पर ध्यानी।।5

समझै जितो समै नीं श्रोतां
इणरो लाभ उठाजै।
चंदो जोड़ सहज में चवड़ै
लहर एक में लीजै।।6

वींद मरो, मरो कै वींदण!
टको विपर रो ताजो।
समझहार समझता रैसी
बजा भलांई बाजो।।7

किणरी गिनर लेस मत करजै
मत डरजै तूं मांटी।
थारै जिसा ओल़खनैं ठावा
चावां री कढ चांटी।।8

कुड़को रोप धरम रो कुशल़ै
सैण फसैला सोरा।
दूर रसीदां काट दिसावर
छक पावै सुख छोरा।।9

का करलै गौशाल़ कारीगर
पंजीयन में कर पासो।
चाटो खाय चटाजै चोगी
गायां नैं दे घासो।।10

भगवत कथा आयोजन भाई!
टैंट गवाड़ां ताणै।
इणरी ओट चूरमा चोखा
मौज महातम माणै।।11

मनहरणी वंतल़ कर मेल़ू
जप ठगणी रो झाड़ो।
छिन में अकल बडां री छीनर
धुर करलै तूं धाड़ो।।12

ट्रस्ट बणालै कोयक टणको
नगद नारायण नामै।
साज समाजूं सेवा सोरी
गोल़ां नैं ठग गांमै।।13

भिड़तां देख भायां नैं भारथ
ठीक दियै जा ठोसो।
तणनैं ऐज लगाजै तिकड़म
खेत बाड़ै नु खोसो।।14

यार इसी तूं लाय योजना
दाम दूणापण दीसै।
ठगलकड़ी ठरकै सूं करजै
बातां विसवा वीसै।।15

है ओ हिंदुस्थान हेताल़ू
चाल भेड री चालै।
चोखां नै टरकावै चवड़ै
घृत धूरतां घालै।।16

सार समै रो समझै भाई
लिख लिख कैयी लोकै।
गैलसफा बाजै सह गुणियण
धीठां नैं जग धोकै।।17

करो भलांई किसड़ी करणी
राखै ऊजल़ रैणी।
भोल़ी जनता देख भारत री
दाद इसां नैं दैणी।।

~~गिरधरदान रतनू दासोड़ी

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