शहीद प्रभू सिंह राठौड़ नें श्रध्धांजली

prabhusinghrathore

AutherGajadanJiडॉ गजादान चारण “शक्तिसुत”
अड़यो ओनाड़ वो आतंक सूं सिंवाड़ै
मौद सूं फूल नह कवच मायो।
अमर कर नाम अखियात इण इळा पर
अमरपुर सिधायो चंदजायो।।

प्रभू नै पियारो होयग्यो प्रभुसिंह
सोयग्यो चुका कर कर्ज सारो।
मौयग्यो मरद वो हिन्द री भोम नै
तनक में खोयग्यो चंद-तारो।।

चंदसुत चालियो सुजस मग चाव सूं
भाव सूं लबालब वीर भारो।
हिन्द री फ़ौज रै हठीलै सूरमै
ललक कर पाक रो लियो लारो।।

दळण कज पाक रा दोगला सिपाही
आकरा सभावां सुभट अड़ियो।
पाक रा मन्सूबां प्रगट जळ फेरकर
प्रतापी राठवड़ भोम पड़ियो।।

उर्वरा खाण खिरजाण रो अंटीलो
जाय आतंक सूं जंग जुड़ियो।
पाळ कर प्रीत कुळ वाट बह पुराणी
प्रभुसिंह पिसण दळ पुहुमि पड़ियो।।

भाटियां तणै भाणेज सूं भिड़या वै
हाकिया ताकिया पिसण हूगा।
दकालां हकालां थाकिया दरिंदा
पाकिया जहन्नुम जाय पूगा।

रंग रे रंग रजथान रा राजवी
लाडला हिन्द रा प्राणप्यारा।
मरण नै अमर कर अमरपुर पूगियो
थिति है छिति पर काम थारा।।

अम्ब भटियाण रो दूध हद ऊजळो
ऊजळी ओम-धण-वलय आल्ही।
ऊजळी मात भू हिन्द री हठीलो
विश्व में कीरति तोर वाल्ही।।

अंजसै पात गजराज नाथाण रो
वीर री शहादत जेण वाची।
प्रभूसिंह कीरति अमर है पुहुमि पर
शक्तिसुत लिखै आ बात साची।।


शंभूदान बारठ कजोई
माछिल मांही मोरचो,झाल्यो थें जूंझार।
अरियो दल़ ऊखाङवा,प्रभु लङियो हद पार।।१।।
दुसमी रा दल़ देखने,आपे हुवो अधीर।
प्राण वारिया पलक मे,वसुधा खातिर वीर।।२।।
मरणो खातर मुलक रे,सूरों तणो सुभाव।
रोंगङ रण मे रोपिया,प्रभु अंगद ज्यूं पांव।।३।।
भल जिणियो मां भारती,वसुधा एहङो वीर।
कण कण गावे कीरती,रंग थारी रणधीर।।४।।
सीम रुखाल़ण शूरवीर,आगे रह्यो अव्वल।
जुग जुग बहसी जगत मे,गोगादे री गल्ल।।५।।
मुसल़ों रा दल़ मारवा,भोम उतारण भार।
सूरो आखिर सांस तक,लङियो कर ललकार।।६।।
क्षत्राणी जग मांहि सिरे,(उण)माता ऊपर मोद।
खेलायो जिण खौंत सूं,गोगादे ने गोद।।७।।
गोगादे भल गरजियो,दुसमी तोङण दल्ल।
लङियो जुद्ध ललकार ने,कट कट रख्यो कव्वल।।८।।
नाहरिया चूका नहीं,आयो जद अवसाण।
वतन रुखाल़ण वारिया,प्रभु नरपत निज प्राण।।९।।
परमवीर परभू जिसा,भीङ पङ्यों भिङ जाय।
नरपत सा नग नीपजे,मरुधर माटी माय।।१०।।
देवण माथा देशहित,हरदम रह्या हरोल़।
प्रभु सरीखा परमवीर,उण सूरों री ओल़।।११।।
सूरों री धर शेरगढ,धिन धिन वांरी धाक।
वार प्राण राखे वतन,नाहर ऊंची नाक।।१२।।
वीर प्राण निज वारिया,कट कट आयो काम।
चावो घर चन्दरेश रे,नाहर कर ग्यो नाम।।१३।।
सूरो सुरगों हालियो,आछो लिख इतिहास,
अमर हुओ इल़ ऊपरे,खिरजां परभू खास।।१४।।
प्रभु नह भूले पीढियां,गासी जस रा गीत।
मोभीङे हिंद मात रे,राखी अंवल़ी रीत।।१५।।
सूरे जद लीधी शपथ,अरी पछाङण आण।
क्षात्रधरम राखण सही,प्रभु दीधा निज प्राण।।१६।।
मारण पाक मलेछङा,खाधो शूरे खार।
गोगादे लङियो गजब,अरियों सूं अणपार।।१७।।
जंग शूरो लङियो जबर,दुसमी तोङण दांत।
शहीदों मे रहसि सदा,प्रभू आगली पांत।।१८।।
चावो कुल़ चन्दरेश रो,बरसो रहसी बात।
हिंद रुखालण होमियो,गोगादे निज गात।।१९।।
भारत रा ऐ भोमिया,माथे हंदा मौङ।
जंग मे जोद्धा जीतणा,राजकुल़ा राठौङ।।२०।।
समरांगण मे सूरमा,बंका नर बेजोङ।
धरा रुखाल़ण धाटवी,राजकुल़ां राठौङ।।२१।।
धिन धिन खिरजां री धरा,शूरा राखण शान।
कण कण जिणरी कीरती,रज गावे रजथान।।२२।।
परगट चलसी पिरथमी,भाण शशियर भल्ल।
जब लग रहसी जगत मे,गोगादे री गल्ल।।२३।।
राखी नित ही राजवी,कुल़ मरयादा काण।
प्रभु बसियो परलोक मे,नामी छोङ निसाण।।२४।।
वरणी न जावे वीरता,कीरत हंदा काम।
गाथा गोगादेव री,शंभू करे सलाम।।२५।।


AutherGirdhardanRatnuगिरधरदान रतनू “दासोड़ी”
शेर ऊपनै शेरगढ,रही आद लग रीत।
रगत देय राखै रसा,असा पुरस अघजीत।।1
मंडै आगल़ मोरचा,खंडै खलदल़ खीझ।
देवै दिलसुध देखलो,रसा सटै सिर रीझ।।2
आगै इण धर ऊपन्यो,अडर गोग अजरेल।
भिड़ जिण अरिदल़ भंजिया,खागां रचिया खेल।।3
रगां रगत जिणरो जबर,खबर पड़ी आ खास।
परभु पटाधर पेखलो,अड़ियो वंश उजास।।4
पतित पाक घुसपेठिया,ओलो ताक अधीर।
पाधर अड़ियो परभड़ो,बंको भारत वीर।।5
छल़िया छानै बड़ गया,देख सीम हिंद डाक।
भिड़ियो छिड़ सुत भारती,नुगरां भांगण नाक।।6
दटियो परभो रण डगर,रटी मुखां हर रेर।
कटियो कमधज देश कज,हटियो नह नर हेर।।7
पुल़िया कोढी पाकिया,देख लगावण दाग।
पाधर भिड़ियो परभड़ो,खींच करां निज खाग।।8
संको कियो न सूरमै,हियो असंको हेर।
रणबंको धिन राठवड़,दटियो डंको दे’र।।9
पग पाछा नह पलटिया,धर हित मरणो धार।
मांटी चरणां मात रै,अरप्यो सीस उतार।।10
अड़ियो अरी उथाल़बा,राखण रजवट रीत।
कुलवट कमधज कोड सूं,परभू करी पवीत।।11
दिया प्राण कज देशरै,जँग में जूझ जवान।
पाण तिहारै परभड़ा,है जय हिंदुस्तान।।12
लड़ियो भारत लाडलो,सीम रुखाल़ण सेर।
परतख कीनो परभड़ा,शिव हद माल़ सुमेर।।13
पग काचा नर पाकरा,बोता रणवट बीह।
पुणां पटाधर परभड़ो,ओ नर सदा अबीह।।14
सह्या संकट सूरमै,पाल़ मात सूं प्रीत।
परभू धर पावन करी,रजवट हंदी रीत।।15
बहियो फुरणां बायरो,संचर्यो छेहलो सास।
पणधर लड़ियो परभड़ो,अवनी पूरण आस।।16
मगर पच्चीसी मांयनै,कमधज आयो काम।
परभू सांप्रत पामियो,नवखँडां जसनाम।।17
चार पखां जल़ चाढियो,खरो अरप धर खून।
परभू कमधज पेखलै,जस हर जपै जबून।।18
पिसणां कीनी परभड़ै,रांघड़ धर कज रीठ।
साम्हो लड़ियो सूरमो,परत न दीनी पीठ।।19
मरै देश कज मोद सूं,रसा जिकै रजपूत।
ऐह कहावत ऊजल़ी,सो धिन करी सपूत।।20
जणणी जिण धिन जामियो,परभू जिसड़ो पूत।
जस खेड़ेचे जगत में,रँग लीधो रजपूत।।21
जाया सो तो जावसी,फरक न इणमें फेर।
परभु मरण जो पामियो,हरस हुवो हिंद हेर।।22
जगचख ससिसर है जितै,रह धू अवचल़ रीत।
रहसी परभू राठवड,गोगाहर रा गीत।।23
पुरजो पुरजो परभड़ो,कमधज पड़ियो कट्ट।
गोगादे ज्यूं गाढ सूं,रखवाल़ी रजवट्ट।।24
माछल में पायो मरण,दाकल करनै दट्ट,
खिरजां नवखंडा करी,ठावी तैं थलवट्ट।।25


नारायणदान सिंढायच “बाँधेवा”
🌺प्रभु सिंह राठौड को श्रध्धांजली🌺
मरदों मरणो एक दिन,गल़ जावेलो गात।
ऊगे अर्क असेस तम,रोज हुवै फिर रात।।१
आज किसो दिन है कहो,प्रभू पुछे प्रभात।
सपने सुरपुर देखियो,वरण अपसरा बात।।२
राखण पण रजपूत रो,बलशाली बेजोड।
परतापी परभू जिसा,नर निपज्या इण ठौड।।३
धिन धिन खिरजा री धरा,धिन भटियाणी धाय।
चावै घर चंदरेस रै,जलम्यो परभू जाय।।४
करज चुकावण कौम रो,भौम उतारण भार।
धौम तप्यो राखण धरा,हौम हाड हर बार।।५
कुल मरजादा कूरबो,धारै मन में धीर।
परभू पाक पछाङतो,रयो खेत रणवीर।।६
माछिल आले मोरचे,जूंझ्यो मोंटी जोर।
सिर अरपण कर संचर्यो,रंग परभू राठौर।।७
मरद डट्यो जा मोरचे,अपणी मूंछ मरोड।
कटियो पर हटियो नहीं,रंग परभू राठौड।।८
सादूलो जद संचरे,सूखै मिरगां सास।
(त्यों)दुसमन सैनिक देखतां,परभू अपणे पास।।९
हठ धारी हमीर सम,प्रणधारी परताप।
दूजो दुरगो देखलो,अनवी परभू आप।।१०
पण धारी परभू जिसा,जिणता लागे जेज।
मम मसतक झुक मात ने,करबद्ध नमन करेज।।११
छल कर माथो छेदियो,सामी छाती छोड।
पाजी मुल्ला पाक रा,रंग परभू राठौड।।१२
कीरत वसुधा कामणी,वरै सदा ही वीर।
मरणो सूरौं मोतङी,तिकै मिलै तकदीर।।१३
आज अर्क तप अनमनो,विरंगो वसुधा वेस।
सुरग सिधावे सूरमो,पहुमी तज परभेस।।१४
अमर इला पर होविया,नारण जिण रा नाम।
रसा रुखालण राखता,हाड होमवा हाम।।१५


मोहनसिंह जी (आर पी एस)कवि मोहन सिंह रतनू
सीमा ऊपर शान सू,प्रभू रोपिया पांव।
कटियो पण हटियो नही,रोसीलो बनराव।।1।।
माछल सेक्टर मोंयने,पाछल दिया न पग्ग।
हवन कुण्ड तन होमियो,जोत जले जगमग्ग।।2।।
खिरजां धर सुद्व खूनरो,कुरबानी दी कट्ट।
रण मोंही रज रज हुओ,राठोड़ी रजवट्ट।।3।।
पग पग थल़वट परगने,ऊपज्या वीर अनेक।
प्रभू सिंह उण पंथ री,टणकी राखी टेक।।4।।
धिन धिन रे थल़वट धरा,धिन जनणी धिन तात।
जिण धर जाहर जनमियो,वीर प्रभु विखियात।।5।।
सुभट जनमिया शेरगढ,खिरजां जिणमे खास।
प्राण निछावर कर प्रभु,अमर हुओ इतिहास।।6।।
शेर परगनो शेरगढ,खिरजां नाहर खाण।
हिंद रुखाल़ण दैश हित,प्रभू अरपिया प्राण।।7।।
दी कुरबानी दैश ने,बीज रुधिर तन बोय।
लाख लाख रंग लेयने,सीमा पर ग्यो सोय।।8।।
भाटी कुल रो भांणजो,भल तापू मरु भोम।
चंद्र सुतन कर चानणो,कुल चमकांई कोम।।9।।
सिरे बापिणि सासरो,सुसरो नरपत सिंह।
ओम कंवर संग ओपती,प्यारी धण परणीह।।10।।
कमधज ते ऊंचो कियो,भारत मां रो भाल।
अंजसे दैश समाज रा,सह अंजसे ससुराल।।11।।
जुध मोंही भिड़ियो जबर,अरि आगल़ अगराज।
प्राण देय धर पोढियो,ओढ तिरंगौ आज।।12।।
गोगादै लड़ियो गजब,कर दुसमण पर क्रोध।
वीर छत्रवट वंश रो,असल घरांणै ओध।।13
गोगादै री गरजणा,पूगी सीमा पार।
हलचल घर दुसमण हुई,हड़कंप हाहाकार।।14।।
प्रभू परम पद पावियो,रखण धरम रजपूत।
दै प्रभू फिर देशमे,प्रभु सरीखा पूत।।15।।


AutherNarpatAsiaनरपत आसिया “वैतालिक”
🌺अमर शहीद प्रभु सिंह नें शब्द सुमन🌺
सीमा माथै शान सूं,मेटण जवन मरोड।
डटियो प्रण ;हटियो नहीं,रंग परभु राठौड।।१
सीमा माथै समर में,लडे बिछा अरि लाश।
खेली होल़ी खून री,सूर प्रभु साबाश।।२
रह्यो रूखाल़ो हिंद रो,अरि-मग कर अवरूद्ध।
कटियो परभू देस कज,जवनां सूं कर जुद्ध।।३
रज जितरी धर ना दई,रांघड व्है रज रज्ज।
रे रणबंका राठवड,क्रोड रंग कमधज्ज।।४
अंगद ज्यूं अडियौ अडर,म्लेच्छ हजारां मझ्झ।
रंग रे परभू राठवड,कटियौ भारत कज्ज।।५
अपछर कीरत री वरी,वीरत सूं कर वार।
परभू तोरण वोंदियो,देवपुरी रे द्वार।।६
रणबंका!डंका बजा,लंका वीरत लूंट।
कीरत थूं खाटै प्रभू,वसियौ धर वैकुंठ।।७
प्याली शोणित रीे पिला,मतवाली मदचूर।
काल़ी नें परभू करी,रण बिच कालीतूर।।८
धवल धरा कसमीर पर,जुध भिड करे जनून।
रंग रंगरेजा! राठवड,खुब रंगी कर खून।।९
डटा मोरचे;ना हटा,कटा शीश कमधज्ज।
मुंडमाल़ माहेश रो,हुओ सुमेरू सज्ज।।१०
परभू थां पर प्रेम सूं,वीरत सुणतां वार।
दोहा नरपत दाखिया,सादर कर स्वीकार।।११


कवि वीरेन्द्र लखावत
गीत चित्त इलोल़
जद जुझणौ जिण क़ौम जाण्यौ,
देश हित दिन रात।
उत वैरियां बाढण बढेला,
अव्वल बंका आत।।
(तो) सौगात जी सौगात दीधी राठवड़ सौगात।।1।।
जित जंग व्है रजथानियां
उत पग जमाया जाण।
पळ प्रभड़ौ जोधाण परगण,
शेरगढ़ री शान।।
(तो) बलवान जी बलवान राजस्थान रौ बलवान।।2।।
खून खिरजा खास रौ बह,
राखियौ जंग रास।
विण वारियौ निज हित वठै,
बण विश्व रौ विश्वास।।
(तो) आकाश जी आकाश जस प्रभ छायगौ आकाश।।3।।
पण पीढ़ियां लग शहादत पा,
जाणियौ गुण जुद्ध।
मद मातृ भू हितार्थ मलफ्यौ,
कमधजौ हुय क्रुद्ध।।
(तो) बलबुद्ध जी बलबुद्ध लड़ियौ जुद्ध प्रभु बलबुद्ध।।4।।
गुण गोगदे रै गिरब जोगै,
वंश री औ आस।
मन मरद मरजादा रखणियौ,
उकत में ऊंचास।।
(तो) प्रकाश जी प्रकाश दीठौ प्रभ रौ प्रकाश।।5।।
चढ़ चंदर सुत राठौड़ चमक्यौ,
गोगदे रै घेर।
उमराव राजल रै कूंख रौ,
दीपियौ बिन देर।।
(तो)कीन्हा झेर जी वो झेर प्रभड़ौ कर दिया झट झेर।।6।।
वो भूलगौ भड़ शीश भल उत,
पाक रै उण पार।
(अर )तूलगौ तोड़ण मींया मद,
जूंझगौ धड़ धार।।
(तो)उणियार जी उणियार सीलै पाक नै उणियारा।।7।।
उण पाक री नापाक हरकत,
पेख आ उण पार।
तट ताणदी बिण तोप ता पछ,
राठवड़ री रार।।
(तो) तकरार जी तकरार कीधी प्रभड़ौ तकरार।।8।।
हर हर करंतौ मुंड हाल्यौ,
भिळण शिव मुंड माळ।
उत सुरग शम्भू लेण ऊभौ,
रुंड माळा राळ।।
(तो)अगवाळ जी अगवाळ शंकर उत खड़्यौ अगवाळ।।9।।


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