शंभु स्तवन

Mahadev

।।दूहा।।
सुंदर सुखदायक सदा, कंदरां वास कैल़ास।
पनंगैसुर पूरै सदा ,आयां चरणां आस।।१
रुंडमाल़ा कंठां रहे ,मयँक सदा सिरमाथ।
फणवाल़ा गल़ फाबता, नमो रीझाणां नाथ।।२
गंगा मसतक में गहर, नहर खल़कै नीर।
अहर निसा उण सूं ,अजब गरजत रीझ गँभीर।।३
राख चढायां रीझवै, तोड़ै दल़द तड़ाक।
दिन वाल़ै धिन दासरा ,भाल़ै भीर भड़ाक।।४
बहै सवारी बैलियो, भलां झेलियो भार।
अहो नाथ अलबेलियो, सदा दासां री सार।।५

।।छंद – भुजंगी।।
नमो वास कैल़ास ऐवास बाबो।
गुढै गात पे धारबा नाय गाभो।
जुड़ै ऐहड़ी बोहल़ी वा जमातं।
नमो शंभु नाथं नमो शंभुनाथं।।१

पड़ै झींफ हीलां उथै बोहपारां।
उथै अंध खैंखाड़ बज्जै अपारां।
रहै जोग अमोघ में दीह रातं।
नमो शंभु नाथं नमो शंभुनाथं।।२

भयंकार भोताड़ उज्जाड़ भाल़ो।
जठै झाड़ झंखाड़ रै सून जाल़ो।
बठै रीझियां साम की थाट बातं।
नमो शंभु नाथं नमो शंभुनाथं।।३

नहीं आपरै चाकरी एक न्याती।
भल़ै दीसतो फाबतो नाय भाती।
सजै डोकरी एकली सेव साथं।
नमो शंभु नाथं नमो शंभुनाथं।।४

नमो गंगधारा हली बैय नांमी।
थिरां सीस में भोल़ियै नाथ थांमी।
सदा दास रै खास हो सुक्खदातं।
नमो शंभु नाथं नमो शंभुनाथं।।५

रहै राकसां भाखसां आप रीझ्यो।
खमा दाबिया दैतड़ां जुद्ध खीझ्यो।
छती भीजियो सेवगां राख छातं।
नमो शंभु नाथं नमो शंभुनाथं।।६

भखै आक धतूर सा पूर भोजं।
रमै रेत जीरांण री बोह मौजं।
बठै मांन गुमान ना एक बातं।
नमो शंभु नाथं नमो शंभुनाथं।।७

अहो रंजियो भंग सूं आप ओपै।
कृपा छांड नैं काम रै सीस कोपै।
गही सूल़ नैं मेटियो कीध घातं।
नमो शंभु नाथं नमो शंभुनाथं।।८

घणा खेलणा भूतड़ा आप गोडै।
किलक्कार कारोल़िया कीध कोडै।
नमो नाथ री टाल़वी ऐज न्यातं।
नमो शंभु नाथं नमो शंभुनाथं।।९

वरै भूखणां अंग पे सोभ बांनी।
करै नाय आडंबरं मींट कानी।
अपै आपरै बाल़कां खूब आथं।
नमो शंभु नाथं नमो शंभुनाथं।।१०

फणक्कार फूंकारता नाग फाबै।
तिका भाविया आविया आप ताबै।
सजै वींटियां झींटियां मांय साथं।
नमो शंभु नाथं नमो शंभुनाथं।।११

जयो लाभ संसार रै जैर जार्यो।
धिनो भाल़ पे चंद आण़द धार्यो।
गहै मृगछाल़ा रखै बांध गातं।
नमो शंभु नाथं नमो शंभुनाथं।।१२

नरां रुंडमाल़ा रखै पैर नोखी।
सजै थान जीराण में देव सोखी।
भली कासिय वासिय नित्त भातं।
नमो शंभु नाथं नमो शंभुनाथं।।१३

पुणां चंपणी आपरा पैर प्यारी।
नमो ऊमिया जामणी गेह नारी।
तवां पूत सूंडाल दूंधाल़ तातं।
नमो शंभु नाथं नमो शंभुनाथं।।१४

भणै गीधियो छंद नै ठाय भोल़ा।
मुदै मेटजै पात रा कर्म मोल़ा।
हिंवां राखजै सीस पे ईस हाथं।
नमो शंभु नाथं नमो शंभुनाथं।।१५

।।कवत्त।।
नमो भोल़िया नाथ, तोड़िया अणहद तोटा।
नमो भोल़िया नाथ, आपिया कितरां ओटा।
नमो भोल़िया नाथ , भांगस धतूरा भोगी।
नमो भोल़िया नाथ ,जगत रा मोटा जोगी।
चढायां राख रीझै चवां, खीझै राकस खाल़िया।
कवियाण गीध संभली कथा, पनँगैसुर संत पाल़िया।।१६

~~गिरधरदान रतनू “दासोड़ी”

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