शत्रु पराजय देवी आवाहण स्तोत्र – कवि डोसा भाई झीबा

शत्रु पराजय देवी आवाहण स्तोत्र।

Trishool

छंद : छप्पय

आवड,खोडल आव, आव मोंगल मछराळी।
मात आव मेलडी,जाग ज्वाळा डाढाळी।
अंबा ,करनल आव,आव बहचर बिरदाळी।
हाली आव हिंगोळ,गैल , राजल , महाकाळी।
समरथ सकळ नव लख शगत,चौरासी सह चारणाँ।
उपरां देवी आवो अवस ,सेवग काज सुधारणाँ॥1

आवो आशापुरा, वऴे आवो वेराई।
मढां गढेची मात,सोरठी शैणल बाई।
सिकोतर, सिंधराय,वडी विहोत,वडेची।
वेग आव वंकाई,देवी आवो डुंगरेची।
आवजो मात पीठड अठे,कर जोडे अरजां करां।
सांभळे अरज नवलख शगत,आवो थैं अम उपरां॥2

रमझम रथ रवराय,आई उपर थें आवो।
कामई ,बूट,बलाळ,बाई खुबड़ बोलावों।
मानल,जैतल मात,चांपल अर चाळकनेची।
बिरवड अर सहदेव,रांण बाई र रवेची।
नागल्ल आव हरजोगरी,जानबाई जुग जाहरां।
आवजो शगत नवलख अठे,विदग वाळी वाहरां॥3

गहली मां गात्राड,आव थुं  वरण उजाळी।
उंघे मत तुं आई,जाग रे जाग जोराळी।
हडक-मोई कर हाक,धाक सुबां दळ धारे।
आवे !ओळग काज,पोहव मोटां कई पारे।
एहडां जोर ताहरां अकळ,कहो मात कठे गयां।
जागती जोगणी हो जबर,आज कियां उंघे रियां॥4

बायुं थइ बुढीह, घणी निंदर घेराणी।
वा गइ हो किं विदेश?,हो गई पंथ हेराणी।
सुणतां सेवग साद,आवतां आधां शकनां।
आवो नह किम आज,साय करवा सेवगनां?
श्रवणां किंयां सुणती नहीं,बाई  किम बहरां हुआ?
समरथ महा सह शगतिया,रोकाई किण विध रिया॥5

छोरु तमणां अमां,मावतर आप अमारा।
धींगा  हो थै धणी,अमां सेवग्ग तमारा।
जो चंडी जोगणी,सुणो नंह रावां श्रवणां।
तौ पुरब दिश तजे,अरक उगे आथमणां।
महराण मौज मेले परी,ध्यान नको  शंकर धरे।
शगतियां सरव सेवग तणांआवो नह अम उपरे॥6

चौरासी चारणी,लाख नव लोवडीयाऴी।
छपन क्रोड चामंड, खरी जोगण खपराळी।
तरशूळांळी तेम, धुंणती धाबळवाळी।
शगति माता सरव तरुण,बुढ्ढी अर बाळी।
सेवगाँ साय करवा संगां, खेतल वीर खेलावजो।
वैरियां दळां करवा  विधन,सह आई वहलां आवजो॥7

~~कवि डोसा भाई झीबा, गांव देगाम धांगध्रा
(प्रेषक :  नरहरदान बाटी विरसोडा)

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