शिव वंदना का भाव-काळिया रा सोरठा

शंकर री कर सेव,जटी, धुरजटी, गंग- धर।
वडो विभु महादेव,कर हर समरण काळिया॥131

परसु-धरण पिनाक,भाल-ससी , भव, भूतपत ।
कापालिक, कर- डाक,कर हर समरण काळिया॥132

नमन करो नटराज,पति नगराज- सुता, परम।
सकल दियण सुख साज,कुण है शिव बिन काळिया॥133

आसुतोस, ईशान, गिरिजावर , कैलास- घर।
अवढर दानी आन,कुण है शिव बिन काळिया॥134

नमोरूप निरवाण,रूद्र, ईश, कंदर्प-हर।
सदा ज बसै स्मशान,कर हर समरण काळिया।135

बाघांबर, गळ- व्याल, अस्थिमाल, आनंदघन।
काल- रिपु, महाकाल,कर शिव वंदन काळिया॥136

त्रिपुरारि ,त्रय- नैन,ध्यान-मग्न,वितरागवर।
सकल़ सुमंगल़ दैन,केवल शंकर काळिया॥137

भसमलसितवपु, भीम,शरणागत- सुख -अभयदा।
अनहद तथा असीम,केवळ शिव जग काळिया॥138

गटकावे नित भांग,गाल फुलावै, घोर-रव।
खपराळो खट्वांग,कह्यो जगत शिव काळिया॥139

तांडव प्रिय, तनु-स्याम; लोचण त्रय, अभिनव ललित।
नित ले सुध चित नाम,काशीपत भज काळिया॥140
~~वैतालिक

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