सोम भाई सोम ! (भाटी सोमसी रतनावत एक ओल़खाण)

प्रकृति रो नियम है कै मोत किणी नैं ई नीं छोडै। भलांई वो कायर होवो भलांई वीर ! मरणो सबनै है पण किणी कवि केयो है कै कायर होवो भलांई वीर पण दोनां रो मरण तय। तोई फरक है, कायर मर धूड़ भैल़ो होवै पण सूर जस री देह में नवो जमारो धारण करै-

सूर मरै कायर मरै, अंतर दोनूं ऐह।
कायर मर माटी मिल़ै, धसै सूर जस देह।।

ऐड़ै ई एक जसधारी री ओल़खाण देय रैयो हूं, जिणरी ओल़खाण आज इतिहास री गरद में दबगी। पण जैड़ो कै कैयो गयो है कै “कवि की जबान पे चढै सो नर जावै ना।” कवि रसना सूं अमर इण सपूत रो नाम है सोमसी भाटी। सोमसी भाटी री ओल़खाण ख्यातां कै दूजै ऐतिहासिक ग्रंथां में उपलब्ध नीं है। राव मंझमराव ( ७८६-८१७) रै बेटै गोगली री संतान गोगली भाटी बाजै। इणी गोगली री वंश परंपरा में भाटी रतनसिंह गोगली होयो। गोगली भाटियां रा जैसलमेर में बारह गांम है जिकै तेमड़ाराय मंदिर रै आसै -पासै वसिया थका है। इण गांमां में एक दो सूना खेड़ा है। कविराजा बांकीदासजी आसिया आपरी ख्यात में लिखै -“सोम गांव वगैरै आठ गांव गोगली भाटी ज्यांरा माड में।” इणी ख्यात में सोमसी विषयक दूजी जाणकारी तो नीं पण इतरो जरूर लिखियो थको है “सोमसी भाटी गायां री वाहर काम आयो। गायां खोसी जद लोक कहै -सोम भाई सोम।” होय सकै सोम गांम इणी सोमसी रै नाम सूं होवै जिको अज सोभ गांम रै नाम सूं आबाद है।

सोमसी भाटी तेमड़ाराय मिंदर सूं दिखणादै पासी बसियै ‘गरल़’ रो वासी हो। मध्यकालीन सिरै डिंगल़ कवि मेहा वीठू री एक मात्र अद्यावधि अणछपी रचना “भाटी सोमसी रतनावत रा छंद” ई इण महान वीर री वीरता रो साखीधर अर ओल़खाण रो स्रोत है। छंद शास्त्र रा दिग्गज कवि अर डिंगल़ छंद वैविध्य रा सुघड़ कारीगर मेहा वीठू इण सोमसी री सूरमाई नै अखी राखण नै सतरै रोमकंद छंद रचिया। मेहाजी री छंदां माथै साधिकार बात अंगेजतै किणी समकालीन कवि कैयो है-

कवितै अलू दूहै करमाणंद
सूर पदै गीतै हरसूर।
मेहो छंदै झूलणै मालो
पात ईसर विद्या चो पूर। ह

सोमसी, मेहाजी सूं खासो पैला होयग्यो हो। कवि, श्रुति परंपरा सूं सुणर ऐ छंद बणाया। निसंकोच कैयो जा सकै कै जे आ रचना नीं होवती तो संभवतः ओ वीर ई असंखू अनाम वीरां भेल़ो हो जावतो। भू गांम री एक पालिवाल बामणी इणरी धरम बैन ही। जिणरै कन्नै नामी नस्ल रो एक सुंदर घोड़ो हो अर घण दूधाल़ू घणी गायां ही। गायां री तारीफ सुणर खेड़ धरा रै राठौड़ खेमकरन उण पालीवाल़णी री गायां रो हरण कर लियो। छंद मुजब छंद खेमकरन गोगलियां री कांकड़ मांय सूं गायां घेर बहीर होयो तो गवाल़ियां आय सोमसी नैं पूरी बात बताई। आ बात सुणर ओ नर आल़स कीकर लावतो-

रिव ऊगां ससि कुंडल़ां, ताता खंभ थयाह।
छत्री पाणी नह पीयै, गायां घेर लियांह।।

जनश्रुति मुजब उण वीर अजेज आपरी धरम बेन सूं घोड़ो मांग राठौड़ां रै लारै खड़ियो अर सोम तल़ाब री पाल़ रै पाखती जाय भिड़ियो। राठौड़ां सूं गायां पाछी खोसली पण ओ वीर आपरै एक बेटै अर सेवग बरघलै नाई साथै वीरगति पायग्यो। सोम तल़ाब री पाल़ कनै एक चूंतरै माथै थापित पाखाण पूतली इण गर्विली गाथा री साखीधर है। कविवर मेहा निष्पक्ष भाव सूं दोनां वीरां री वीरता बखाणतां सोमसी रै सुजस री सोरम अखी मानी है। क्यूंकै ओ वीर जन हितार्थ जूझियो। छंद रो एक दूहालो कवि रै सबद संयोजन अर वर्णन विसदता नैं परखण सारू-

वयणूं वख वच्चिय, वांण विरच्चिय
फौज विरच्चिय ओड फरू।
जल़ कांठल़ जच्चिय, सूप धणच्चिय
साख सच्चिय सत्त सरू।
चँडी जोगण चच्चिय, नारद नच्चिय
कोतक रच्चिय खेल कियूं।
मिल़िया महवच्चिय, घड़ माडेचिय
जुद्ध समेचिय जादवियूं।।

ओ वीर उण इलाकै में आज ई लोकदेव रै रूप में पूजीजै।।

संदर्भ -मेहा वीठू काव्य संचै
संपादक -गिरधरदान रतनू दासोड़ी

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