श्री सोमनाथ महादेव स्तुति – गंगारामजी बोगसा, सरवड़ी कृत

Mahadev।।दुहौ।।
आठ सिध नव निध अत, अन धन वधै अपार।
सोमैयो स्यायक सदा, रहै संता त्रिपुरार।।

।।छंद – भुजंगी।।

नमो स्याय संता नमो सोमनाथं, महाजोग जोगेस दक्खं(दक्ष) जमातं।
जुधं काम पूर्यो प्रथी वात जानं, थरू वास कैलाश उद्यान थानं।।1

धर् या हात धानंख त्रेसूल धारी, त्रये नेत्र अगनी जरै त्रिपुरारी।
गले रूंडमाळा जटाधार गंगा, उमा प्राण प्यारी सदा वांम अंगा।।2

भख्यौ काळकूटं भयानंख भारी, अहीफेन सूगं धतुरां अहारी।
भलै तेज चंदं ललाटं भळक्कै, कितं भूत पिछास(पिशाच) दौळी कलक्कै।।3

कर् यौ वाहनं रीझ कै नंदकेसं, वजावै करं आप डम्रू विसेसं।
चित्त रीझ धारी म्रगाधीश चरमं, प्रभू आद पुरषं अजोनी परमं।।4

गळै हींडळै नाग हारं गहीरं, धर्यां जोग समाध ध्यानं सधीरं।
अलेखं अभेदंस जीते अनंगं, अमोह अलेपंस वैराग अंगं।।5

वडा वितरागं समंसांन वासी, नराकार आकार कासी निवासी।
प्रछंद भुजाडंड रूपं अपारं, वरजत अंग सकेरं विकारं।।6

उरं आयुतं नाथ सोभा असेषं, वनी कट्ट खीनं अनोपं विसेषं।
रजै भस्म स्वेतं सदा स्वेत रूपं, औपै मेखला कट स्यामं अनूपं।।7

वडै हेत सुं प्रस्न मुखं वखानं, भळक्कै प्रभा अंग कोटेक भानं।
अजंवन संभू तणौ रूप अेकं, विदारै जरा जंम दुखं विसेखं।।8

करे जोङ ‘गंगेव’ अस्तूत कीदी, लजा राख माहेस तो ओट लीदी।
भजै ज्यां नवाजै सदा नाथ भौळौ, जरा जनम रोगं करै दुखं जौळौ।।9

।।दुहौ।।
गाल वजायां ‘गंग’ धरै, नहचै करै निहाल।
मिटै रोग जांमण मरण, सकल अंधारौ साल।।

~~गंगारामजी बोगसा, सरवड़ी कृत
(संकलन व टंकण – महेंद्र सिंह नरावत, सरवड़ी)

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