🌺आखर रो उमराव – सोरठिया गज़ल🌺

आखर रो उमराव,अवस कवि सुण आसिया।
समपै लाख पसाव, अवस कवि सुण आसिया।

दाखत दोहा छंद, गज़ल गीत कहतौ गज़ब।
भरने उरमें भाव, अवस कवि सुण आसिया॥

गीत दोहरा छंद, ह्रदय भाव बेकार है ,
गैला रो औ गांव,अवस कवि सुण आसिया॥

आणंद हिय अणपार, साजण रे आयां थका।
नीतर मरतौ साव, अवस कवि सुण आसिया॥

तन रो मिटसी ताव, मन री मिटसी मांदगी।
सुंदर गजल बणाव, अवस कवि सुण आसिया।

नरपत छोड’र नाम, मन रा आखर मांडणा।
आवत ही उर भाव, अवस कवि सुण आसिया॥

~~नरपत आवडदान आसिया”वैतालिक”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *