श्री आवड़ माँ का गीत गग्घर निसांणी – श्री सालुजी कविया गांव बिराई

।।दोहा।।
अणियार भले री ऊजळी मुख जलेरी माय।।
मात सात री मंडळी रमो त्रेमड़े राय।।१।।

।।गग्घर निसांणी।।
आवड़ मढ अच्छं, विमल विरच्छं, मिल मंजर महकन्दा हैं।
तरवर शुभ सज्जं, फरहर धज्जं, दीपक थान दिपन्दा हैं।
प्रतमा गह पूरं, चड़त सिन्दुरं, सुचंगे पाटम्बर ओपन्दा हैं।
कुण्डळ करणालं, रूप रसालं, जगमग ज्योत जगन्दा हैं।।१।।

हिंगळ गलहारं, मणि मुक्तारं, कण माणक भळकन्दा हैं।
कंचन चुड़ालं, वीस भुजालं, खाग त्रिसूल खिवन्दा हैं।
खेतल मिल खेला, संग सचेला, प्याला मद पीवन्दा हैं।
खप्पर खल खाणं, पल रगताणं, जोगण दळ जीमन्दा हैं।।२।।

आयल आखाड़ा, प्रगट प्रवाड़ा, नर सुर नाग निमन्दा हैं।
विध कर नर वंदे, चंवर करन्दे, सेवा सुर साजन्दा हैं।
घंटा घड़ियाळं, त्रहक त्रंबाळं, झालर सुर झणणन्दा हैं।
नौबत निसाणं, सबद सुहाणं, घरहर भेर घुरन्दा हैं।।३।।

पैताळ ऊपगे, टुकड़ मृदंगे, वीणा सितार वाजन्दा हैं।
करताळ कहक्के, डाक डहक्के, राग छत्रीस रचन्दा हैं।
पंचहि पकवानं, जगत जिहानं, भोजन थाळ भरन्दा हैं।
सीरा दध साकर, भैसा बाकर, चाचर फूल चड़न्दा हैं।।४।।

लीधा नव लक्खं, सपत सपक्खं, सिंहासन सोहन्दा हैं।
देवी दरबारं, सांज सवारं, कव स्तुति करन्दा हैं।
मामड़ सुत माई, सिद्ध सवाई, दिन प्रत मौज दियन्दा हैं।
गग्घर निसांणी, बिरद वखांणी, ईम सालम आखन्दा हैं।।५।।

~~श्री सालुजी कविया गांव बिराई

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