ऊभी आई हूं अर आडी निकल़ूंली

राजस्थानी साहित्य में आपां विशेषकर चारण-काव्य पढां या उण माथै लिख्योड़ी समीक्षावां या टिप्पणियां पढां तो आपांरै साम्हीं एक बात अवस आवैली कै चारण-काव्य में फखत अतिशयोक्ति अर ठकुरसुहाती ई मिलैला।
इण विषय में म्हारो ओ विनम्र निवेदन कै ऐड़ो कुणसो काव्य या कवि हुयो है जिकै आपरै काव्य-नायक रो चरित्र चित्रांकन करती वल़ा इण अलंकार रो प्रयोग नीं कियो हुव ? अर ठकुरसुहाती रै विषय में म्हारो निवेदन है कै एकर ऐ चारण कवियां रो विसर काव्य अवस पढै। जिण लोगां माथै उणां लिख दियो पण आपां आज रा तथाकथित निडर आलोचक उणां री संतति नै सुणावता ई थरका करां।
ऐड़ी ई एक बात नाणै ठाकुर चिमनसिंह अर उणरै कुंवर लालसिंह री है, पण असल में ऐ बात नायक नीं है। बात नायिका री है अर उवा है लालसिंह री जोड़ायत अगरां।[…]

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जस री नदियां जगत में।

दातार अर दातारगी री बातां सुणां तो मन मोद सूं भर जावै कै इण धरती माथै एक सूं बधर एक दातार हुया है। जिणांरी उदात्त मानसिकता अर ऊजल़ चरित्र री ओट लेय ईश्वरीय शक्ति नै ई आपरो काम कढावण सारू इणांनै आदेश दैणो पड़्यो अर इधकाई आ कै इणां उण आदेशां री पाल़णा में रति भर ई ढील नीं करी।

ऐड़ी ई एक गीरबैजोग बात उण दिनां री है जिण दिनां जामनगर माथै जाम सत्रसालजी रो राज हो। सत्रसालजी, जाम रावल जैड़ै मोटै दातार री परंपरा में हुया। जिणां रै विषय में किणी कवि कह्यो है–

हाल हिया जा द्वारका, करां ज उत्तम कांम।
जातां जादम भेटसां, वल़ता रावल़ जांम।।

सत्रसालजी ई वीर, साहसी अर दातार नरेश हा।[…]

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वैश्विक महामारी “कोरोना”

वैश्विक महामारी “कोरोना” से निजात पाने के लिए सभी अपने अपने स्तर से प्रयासरत हैं। वैज्ञानिक अनुसंधान कर रहे हैं, राजनेता इस चुनौती का सामना करने के अनुरूप नीतियाँ बना रहे हैं, सरकारी कर्मचारी अथक प्रयास करके इन नीतियों को कार्य रूप में परिणित कर रहे हैं, व्यवसायी इस विषम परिस्थिति से जूझ रहे तन्त्र को आपदा राहत कोष में आर्थिक मदद कर रहे हैं, स्वयंसेवी संस्थाएं इस परिस्थिति के मारे अपार जन समुदाय को भोजन एवं रात्रि विश्राम जैसी मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध करने की दिशा में जमीनी स्तर पर कार्य कर रही है, चिकित्सक इस महामारी से संक्रमित मरीजों […]

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ભગવતી આઈ શ્રી વાનુમા – મોરઝર (भगवती आई श्री वानुमा मोरझर)

માતૃપૂજાની શરૂઆત તો સૃષ્ટિના પ્રારંભ સાથે જ થઈ હશે. ભારતમાં તો આદિકાળથી જ માતૃપૂજા થતી આવી છે.

વેદોમાં પણ જગદંબાને સર્વદેવોના અધિષ્ઠાત્રી, આધાર સ્વરૂપ સર્વને ધારણ કરનારા સચ્ચિદાનંદમયી શક્તિ સ્વરૂપે વર્ણવામાં આવ્યા છે.

લોકજીવનમાં પરંપરાગત શક્તિ-પૂજા સાથે ચારણો ના ઘેર જન્મ લેનાર શક્તિ અવતારોની પૂજાનું પણ વિશિષ્ટ અને મહત્ત્વપૂર્ણ સ્થાન છે.[…]

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सहजता और संवेदना को अभिव्यंजित करती कहानियां।

राजस्थानी कहानियों की गति और गरिमा से मैं इतना परिचित नहीं हूं जितना कि मुझे होना चाहिए। इसका यह कतई आशय नहीं है कि मैं कहानियों के क्षेत्र में जो लेखक अपनी कलम की उर्जा साहित्यिक क्षेत्र में प्रदर्शित कर अपनी प्रज्ञा और प्रतिभा के बूते विशिष्ट छाप छोड़ रहे, सरस्वती पुत्रों की लेखनी की पैनी धार और असरदार शिल्प शैली से प्रभावित नहीं हुआ हूं अथवा उनके लेखन ने मेरे काळजे को स्पर्श न किया हो। निसंदेह किया है। इनकी कहानियों ने न केवल मेरे मर्म को स्पर्श किया है अपितु इनकी लेखन कला, भाषा की शुद्धता तथा भावाभिव्यक्ति के कारण इन लेखकों की एक अमिट छवि भी मेरे मानस पटल पर अंकित हो गई है।[…]

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पुस्तक समीक्षा: जीवटता री जोत जगावतो अंजसजोग उल्थौ: चारु वसंता

साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली रै अनुवाद पुरस्कार 2019 सूं आदरीजण वाळी काव्यकृति ‘चारु वसंता’ मूळ रूप सूं कन्नड़ भासा रो देसी काव्य है, जिणरा रचयिता नाडोज ह.प. नागराज्या है। इण काव्य रो राजस्थानी भावानुवाद करण वाळा ख्यातनाम साहितकार है-डाॅ. देव कोठारी, जका आपरी इतियासू दीठ, सतत शोधवृत्ति अर स्वाध्याय प्रियता रै कारण माड़ भासा राजस्थानी रा सिरै साहितकारां में आपरी ठावी ठौड़ राखै। डाॅ. कोठारी प्राचीन राजस्थानी साहित्य, खास कर जैन साहित्य रा उल्लेखणजोग विद्वान है। हर काम नैं पूरी ठिमरता अर दिढता सूं अंजाम देवण री स्वाभाविक आदत रा धणी डाॅ. कोठारी ‘चारु वसंता’ काव्य रो उल्थौ ई घणै धीरज सूं कियो है।[…]

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जाट सिर झाट खागां

मध्यकालीन इतियास नै पढां तो व्यक्तिगत अहम पूर्ति अर व्यक्तिगत वैमनस्यता री बातां तो साची निगै आवै पण जिण जातिगत वैमनस्यता अर कटुता री बातां आजरै इतियासकारां लिखी है वै सायत घणीकरीक मनघड़त अर गोडां घड़्योड़ी लागै क्यूंकै जातिगत कटुता उण जुग में सायत नीं ही अर जे ही तो ई आजरै संदर्भ में जिको मनोमालिन्य है उवो जातियां में नीं हुय’र मिनखां में हो। भलांई उण दिन मिनख कमती हा पण मिनखाचार घणो हो। क्यूंकै उण जुग में ऐड़ा दाखला पढण में नीं रै बरोबर आवै। उण जुग में एक बीजै रै पेटे सनमान, अपणास समर्पण अर अपणास खोब-खोब’र भर्योड़ी ही।[…]

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आंखड़ियांह देखां पदम

बीकानेर रो इतियास पढां तो एक नाम आपांरै साम्हीं आवै जिको वीरता, अडरता, उदारता, री प्रतिमूरत निगै आवै। वो नाम है महाराज पदमसिंहजी रो। पदमसिंहजी जितरा वीर उतरा ई गंभीर तो उतरा ई लोकप्रिय। किणी कवि कह्यो है–

सेल त्रभागो झालियां, मूंछां वांकड़ियांह।
आंखड़ियांह देखां पदम, सुखयारथ घड़ियांह।।

पछै प्रश्न उठै कै इण त्रिवेणी संगम री साक्षात प्रतिमा मुगलां रै अधीन कै उणांरो हमगीर क्यूं रह्यो?[…]

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नर लेगो नवकोट रा

मारवाड़ रो इतियास पढां तो एक बात साम्हीं आवै कै मारवाड़ रा चांपावत सरदार सामधर्मी सबसूं ज्यादा रह्या तो विद्रोही पणो ई घणो राखियो यानी रीझ अर खीझ में समवड़। मारवाड़ में चांपावतां नै चख चांपा रै विरद सूं जाणीजै। जिणांनै कवियां आंख्यां री संज्ञा दी है तो बात साव साफ है कै उणां आंख्यां देखी माथै ई पतियारो कियो-
आंख्यां देखी परसराम, कबू न झूठी होय।  अर जठै हूती दीठी उठै राज रा सामधर्मी रह्या अर जठै अणहूती दीठी उठै निशंक राज रै खिलाफ तरवारां ताणण में संकोच नीं कियो।[…]

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जंबुक ऐ क्यूं जीविया?

रोटी चीकणी जीम लैणी पण बात चीकणी नीं कैणी री आखड़ी पाल़णिया केई कवेसर आपांरै अठै हुया है। आपां जिण बात री आज ई कल्पना नीं कर सकां, उवा बात उण कवेसरां उण निरंकुश शासकां नै सुणाई जिणां रो नाम ई केई बार लोग जीभ माथै लेवता ई शंक जावता।

ऐड़ो ई एक किस्सो है महाराजा जसवंतसिंहजी जोधपुर (प्रथम) रो।[…]

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