नाथजी रा सोरठा

जपतां जपतां जाप, आप बण गया औलिया।
पंड रा म्हारा पाप, नष्ट करौ अब नाथजी।१
तन रो कर तंबूर, मन वाणी मनमोवणी।
जोगी छेड जरूर, निज अंतर सूं नाथजी।।२
नीरमळ गंगा नीर, ऊजळ चित इम आपरो।
तिण सूं बैठौ तीर, नरपत न्हावण नाथजी।।३
पडूं तिहारै पाय, चरणां रो चाकर रखौ।
रीझौ हे गुरूराय, नुगरौ हूं घण नाथजी।।४[…]

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शिव वंदना प्रबीन सागर से

।।छंद त्रिभंगी।।
गिरिजा के स्वामी, अंतरजामी, निर्मल नामी, सुखकारी।
लाई रति अंगा, नाचत चंगा, धरी उमंगा, अति भारी।
सुख संपति दायक, पूजन लायक, भूतहि नायक, भयहारी।
तनु पें गजखाला, ओढ बिसाला, मुंडनमाला, गलहारी।।१[…]

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કામપ્રજાળણ નાચ કરે

એક દિવસ આનંદ ધર, હર હરદમ હરખાય;
કરન નાચ તાંડવ કજુ, બહુ બિધી કેફ બનાય.
ઘટ હદ બિજ્યા ઘૂંટી કે, આરોગે અવિનાશ;
લહર કેફ અનહદ લગી,પૂરણ નૃત્ય પ્રકાશ.
લિય સમાજ સબ સંગમે, ત્રયલોચન તતકાળ;
કાળરૂપ ભૈરવ કઠિન, દિયે તાળ વિકરાળ.
ઘોરરૂપ ઘટઘટ ભ્રમણ, ઊતયા-રમણ અકાલ;
કારણ જીવકો આક્રમણ, દમન-દૈત દ્દગ-ભાલ.
લખ ભૈરવ ગણ સંગ લિય, ડાકિની સાકિની ડાર; […]

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भोल़ियै नाथ रै चरणां में म्हारी एक डिंगल़ रचना

छंद भुजंगी
नमो वास कैल़ास ऐवास बाबो। गुडै गात पे धारबा नाय गाभो।
रहे जागतो जोग में दीह रातं। नमो श़भु नाथं नमो शंभुनाथं।।६
भयंकार भोताड़ उज्जाड़ भाल़ो। जठै झाड़ झंखाड़ रै सून जाल़ो।
बठै रीझियां साम की थाट बातं। नमो श़भु नाथं नमो शंभुनाथं।।७

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शिव स्तुति – पन्नारामजी मोतीसर जुढिया कृत

छंद नाराच
करूं प्रणाम जोग धाम संग धाम गो सिरं।
भुजंग दाम कंठ ताम रक्त नाम लेररं।
महान थान छै अकाम मुक्ति ग्राम मगलं
नमो शिवाय सोमनाथ मो अनाथ को मिलं।। १

नगन्न अंग सीस गंग धूत रंग धारणी।
अफीम भंग बीज चंग पान रंग पारणी।
मतंग चाल पे विराज साज ध्यान निस्चलं।।
नमो शिवाय सोमनाथ मो अनाथ को मिलं।। २ […]

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महादेव महिमा

।।गीत – प्रहास साणोर।।
जय जारियो गरल़ नै जगत हित जटेसर।
नटेसर सरल़ धर रूप नामी।।
खल़ां कर रूठियां त्रिशूल़ां खयंकर।
भोल़िया भयंकर नाथ भामी।।१।।

खल़कती गंग नै जटा मे खपाई।
भंग मे हुवो मद मस्त भारी।।
क्रोध मुर लोयणां सहै कुण कोपियां।
थहै कुण रीझियां पार थारी।।२।।[…]

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श्री सोमनाथ महादेव स्तुति – गंगारामजी बोगसा, सरवड़ी कृत

।।छंद – भुजंगी।।

नमो स्याय संता नमो सोमनाथं, महाजोग जोगेस दक्खं(दक्ष) जमातं।
जुधं काम पूर्यो प्रथी वात जानं, थरू वास कैलाश उद्यान थानं।।1

धर् या हात धानंख त्रेसूल धारी, त्रये नेत्र अगनी जरै त्रिपुरारी।
गले रूंडमाळा जटाधार गंगा, उमा प्राण प्यारी सदा वांम अंगा।।2

भख्यौ काळकूटं भयानंख भारी, अहीफेन सूगं धतुरां अहारी।
भलै तेज चंदं ललाटं भळक्कै, कितं भूत पिछास(पिशाच) दौळी कलक्कै।।3[…]

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||शिव वंदना अष्टक – जोगीदान गढवी कृत||

छंद: त्रिभंगी

करतुंड कटंकर खाग खटंकर मुंड मटंकर भयभीन्ना |
मंथन दधी मंकर भुजबल भंकर गरल गटंकर गणकीन्ना ||
निलकंठ नटंकर लचक लटंकर जटा जटंकर जणणाटी |
नम हर शिव शंकर डाक डणंकर धोम धणंकर धणणाटी||01||

जोगण पत जंकर बात बधंकर दक्ष दधंकर हथलीन्ना |
गीयणां गणणंकर चकर चटंकर प्रथी पटंकर रतपीन्ना ||
दावानल दंकर फाट फटंकर खडग खटंकर खणणाटी |
नम हर शिव शंकर डाक डणंकर धोम धणंकर धणणाटी||02||[…]

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