श्री राम वंदना

।।छंद-मधुभार।।
करुणा निकेत, हरि भगत हेत।
अद्वैत-द्वैत, सुर गण समेत।।१
हरि! वंश हंस। अवतरित अंश।
नाशन नृशंश। दशकंध ध्वंश।।२
वर प्रकट वंश! ईक्षवांकु अंश!
पृथ्वी प्रशंश! वरदावतंश।।३
रघुनाथ राम। लोचन ललाम।
कोटीश काम। मनहर प्रणाम।।४

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श्रीराम वंदना

।।छंद – मधुभार।।

करुणा निकेत,हरि भगत हेत।
अद्वैत-द्वैत, सुर गण समेत।१
हे वंश हंस।अवतरित अंश।
नाशन नृशंश।दशकंध ध्वंश।।२
रघुनाथ राम। लोचन ललाम।
कोटिश काम।मनहर प्रणाम।।३
मुखहास मंद।कारूण्य कंद।
दशरथ सुनंद।दुखहरण द्वंद।।४
वर वदन चंद।केहरी स्कंध।
जय जगतवंद्य।छल हरण छदं।।५

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