शिव स्तवन

🍀छंद :त्रिभंगी🍀
वसतौ गिरि हिम पर,अर गिरिजावर,तन बाघांबर , है धारी।
गळ राखत विषधर, भाल चंद्रधर,जटा गंगधर , त्रिपुरारी।
मन धरत उमंगधर जिणनै मुनिवर,देव दिगंबर, महादेवम्।
जय जय शिवशंकर, हे प्रलयंकर, सुंदर सुखकर, सत्य शिवम्॥1॥ […]

» Read more

नवदुरगा स्तवन

🌺छंद रोमकंद/त्रिभंगी🌺
तनया गिरि राजम ,बैल बिराजम, बाळक लाजम, राख सदा।
कर कंज त्रिशूलम , रूप अनूपम, चंदम पूनम, रश्मि प्रदा।
वर वांछित दातम, हे अवदातम , मो घट घातम, टाळ मया।
दुरगा नव वंदण, भै मन भंजण, वैरि विखंडण, जै विजया।1 […]

» Read more

आवड वंदना

🌹छंद त्रिभंगी🌹

लखनव अगवाणी, हे सुररांणी, मां महरांणी, कल्यांणी।
कर खडग कृपाणी, जोगण जांणी,शिव पटराणी, वाखाणी।
धोरां धणियांणी, निरमल वांणी, वीणापाणी, वरदाया।
जोगण जाळेची, चाळकनेची,नमो नभेची, महमाया॥1
जय नमो नभेची सुरराया। […]

» Read more

राधा रुप रस चंद्रिका

🌺त्रिभंगी छंद🌺

आंख्या अणियाळी, काजळ वाळी ,काळी काळी, गाढाळी।
सावक हिरणाळी, रसिक रुपाळी, भोळी भाळी, नखराळी।
नित रहूं निहाळी, सरल सुखाळी, करुणावाळी, मन भावण।
राधा रस कामण, रुप रीझावण, दमकै दामण, जिम सावण॥1 […]

» Read more

नव नाथ स्तवन

🌺छंद त्रिभंगी🌺
जय अलख निरंजण, भव दुःख भंजण, खळ बळ खंडण, जग मंडण।
शंकर अनुरंजण, नित रत जिण मन, प्रणव प्रभंजण, जिम गुंजण।
गुरू देव चिरंतन, आदि अनंतन, सब जग संतन, रूप दता।
नव नाथ निवंता,आणंद वंता,मन मुदितंता, नाचंता॥1॥ […]

» Read more

भैरव स्तवन

🌺छंद त्रिभंगी🌺
काशी रा काळा, दीन दयाळा,वीर वडाळा, वपु -बाळा।
कर दंड कराळा, डाक-डमाळा, चम्मर वाळा, खपराळा।
मथ अहि मुगटाळा, ललित लटाळा, घूंघरवाळा, छमां छमा।
खं खेतरपाळा, रह रखवाळा, रूप निराळा, नमां नमां॥1॥ […]

» Read more

गणपति वंदना

🌺छंद त्रिभंगी🌺

दुख भंज दुँदाळा, देव दयाळा, सुत शिव वाळा, गिरजाळा।
जय चार भुजाळा, हे फरसाळा, नमन निराळा, मन वाळा।
वंदन विरदाळा, तरसूळाळा आव उताळा, गणनाथम्।
रिधि सिधि रा स्वामी, नाथ नमामी, हुं खल कामी, माफ करम्।1

आखू असवारी, गज मुख धारी, हुं बलिहारी, हुं थारी।
नह जिण री कारी, संकट भारी, उण दो जारी, दुख हारी।
भगतां रा भारी, हे हितकारी, द्रढ व्रत धारी, इक दंतम्।
रिधि सिधि रा स्वामी नाथ नमामी, हुं खलकामी, माफ करम्।।2

» Read more
1 3 4 5