लाख़ा जमर रौ जस – स्व श्री भंवर दान झणकली कृत

किरनाल़ कुल़ रौ कलंक राजा,कंश बनकर कौफीयौ।
निकलंक गढ़ जौधाण़ रौ नव कुंगरौ नीचौ कीयौ।
माॉघण़ा छौड़ौ दैश मुड़धर, हुकम घरघर हाल़ीया ।
धनवाद चारण़ जात उण दिन लाख जीवण जालिय़ा ।[…]

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श्री करणी जी रौ छन्द

मन मन्दिर रा मावड़ी,करणी खौल कपाट।
सुन्दर रचना कर सकु,करणी रुप विराट।।

आदी अहुकारण
आदि अहुकारण सकल़ उपासण मान सुधारौ जौगमाया।
पंचो तंत सारै त्रिगुण पसारै घिर ब्रह्मन्ड थया।
नखतर निहारिका नैम नचाया ध्रुव गगन गंगा धरणी।
नित नमस्कार नवलाख निरंतर करणी करणी जय करणी ।।1।। […]

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भवाष्टक – कवि जोगीदान कविया (सेवापुरा)

भवा अन्न तू धन्न तू विश्व व्यापै,भवा कर्म तू धर्म तू आप आपै।
भवा नेम तू व्रत तू सृष्टि साधै, भवा काम सारै लियाँ नाम आपे।।१।।

भवा भक्त रै रूप तू शक्ति सेवै,भवा शक्ति रै रूप तू भक्ति देवै।
भवा भक्ति रे रूप तू चित्त सोधै, भवा चित्त रै रूप तू धी प्रबोधै।।२।। […]

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छंद करनीजी रा – कवि गंगारामजी बोगसा

छंद करनीजी रा-गंगारामजी बोगसा रा कहिया 

देवी डाढाल़ीह, काछेली हेलो कियां।
आवै उंताल़ीह, व्रन रुखाल़ी वीसहथ।।

।।छंद।।
बोत विरोध विचार अकब्बर
नीच अनीत करी अनियाई।
भामण तेड़ लही छल़ भीतर
हिंदूस्थान म्रजाद हटाई।
साहल़ भूप पीथल्ल की सांभल़
एकण साद तणै पुल़ आई
वीसहथी करनी व्रन वाहर म्हांरीय साय करो महमाई।।१[…]

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प्रेमहि के नहिं जाति रु पांतिहु – चाळकदान रतनू ‘मोड़ी चारणान’

प्रेमहि के नहिं जाति रु पांतिहु, प्रेमहि के दिन राति न पेखो।
प्रेमहि के नहिं जंत्र रु मंत्रपि, प्रेमहि के नहिं तंत्र परेखो।
प्रेमहि के नहिं रंग रु रूपहि, प्रेम के रंक न भूप नरेखो।
प्रेमहि को अद्भुत्त प्रकार स लोह रु पारस सों लख लेखो।। […]

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आज हमारी बेर इति करनादेय

दूहा

सिंवर सिंवर रसणा थकी अम्बे करी अबेर।
दुविधा मेटण दास री सगत आव चढ़ शेर।

छंद-सवैया

मामड़ियाल डस्यो अहि मैर को,जैर को होय सक्यो नहीं जारण।
आवड़ ऊगत आण दरायके ,भाण पे लोवड़ को पट डारण।
पाय पीयूष दियो झट लाय’र है निज भ्रात जीवारण।
आज हमारीय बैर इति करणादेय देर करी केहि कारण।।।1।। […]

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अम्बा-अष्टक

लाख असी चव जोणिय मांझल जाणिय मानव श्रेष्ठ जमारो।
धीर विवेक तुला पर तोल अमोल सतोल सुबोल उचारो।
तारण या भवसागर सों गजराज न दीखत और सहारो।
बार हि बार उचार अलौकिक अम्ब सुनाम उबारण वारो।।1।।[…]

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।।शिवाष्टक।। – कवि जगमाल सिंह “ज्वाला” सुरतांणिया कृत

।।छंद।।
नहचे अधनंगा शिखर उतंगा आसन चंगा अवतारी।
पीयत घण पंगा गिरजा गंगा भूत भडंगा भयहारी।
लगताय लफंगा जट सिर जंगा प्रेत पिचंगा रूप बणे।
घण गंग झकोळा हरदम खोळा भोळा भोळा नाम भणे।1। […]

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