ગઝલ

ડેલીયો માં ડાયરો થાતો નથી.
એટલે હું ગામડે જાતો નથી.
રાસડા ,ગીતો ને છંદો ગુમ થયા,
રસ ભરી વાતો નથી,રાતો નથી.
ગામડા ને શ્હેર છે ભરખી ગયું,
ગોંદરે જણ એક દેખાતો નથી.
આમ્રવન બદલાઈ ગ્યું છે ફ્લેટ માં,
કોકિલા નો સાદ સંભળાતો નથી.[…]

» Read more

ગઝલ- સુખનવર સંગે ગઝલ છે.

કેટલું સુંદર યુગલ છે.
સુખનવર સંગે ગઝલ છે.
આપની યાદો થી નભનાં,
વાદળા સઘળા સજલ છે.
જો તમે હો સાથ માં તો,
જિંદગી મારી સફળ છે.
આંગણે મહોર્યો છે આંબો,
લાગણી નાં મીઠા ફળ છે.[…]

» Read more

ગઝલ

રસ ભરી વાતો ગઝલ માં હોય છે.
સ્નેહ નો નાતો ગઝલ માં હોય છે.
ચાંદ, તારા, ફૂલ, ઝાકળ થી સભર,
મેઘલી રાતો ગઝલ માં હોય છે.
સૂર, તુલસીદાસ, નરસી મય બની,
આતમો ગાતો ગઝલ માં હોય છે.
હા !વલોणुं થાય ઘમ્મર ગામડે
એવી પરભાતો ગઝલ માં હોય છે.[…]

» Read more

कभी-कभी तो दिल की भी मान लिया कर!

कभी- कभी तो दिल की भी मान लिया कर!
मुरझे हुए चेहरों पर भी मुस्कान दिया कर!!

निष्ठुरता से, बने रिस्ते भी भूल जाते हैं लोग!
उत्साह उमंगों की तरंगों का छात तान लिया कर!!

अपनी मस्ती में मस्त रहना भी ठीक नहीं यार!
कभी कभी दूसरों के देख अरमान लिया कर!!

लोगों की बातों का क्या ? वो होती रहती है!
अपनी बातों को सुनाने की कभी ठान लिया कर!![…]

» Read more

गज़ल की गज़ल

सन्नाटे को चीर गज़ल।
बन जाती शमशीर गज़ल॥1
शायर ने क्या खुब सजाया,
लगती जैसे हीर गज़ल॥2
जन जन के मन की जाने है,
संवेदन की पीर गज़ल॥3
नटखट कवि कान्हा को मिलने,
राधा बनी अधीर गज़ल॥4
चित में बस छाई फगुनाई,
छिडकै सदा अबीर गज़ल।5[…]

» Read more

गजल: देख लै – कवि जी. डी. रामपुरिया

🌺गजल🌺
चीरड़ा चुगता गळी गोपाळ देख लै।
पेट सारूं सैंग ही पंपाळ देख लै।।

मोह-माया रो दिनो दिन वाधपो दीसे।
काल कुण देखी है गैला काळ देख लै।।

प्रीत री माळा है काचे सूत में पोई।
रीत रिसती जा रही परनाळ देख लै।।

चींचड़ा कुरसी रै कितरा जोर सूं चिपिया।
लपलपाती जीब गिरती लाळ देख लै।।[…]

» Read more

ग़ज़ल: बेलियों नें गाल़ दूं

धूड पर जाजम धरो री ढाल़ दूं।
बैठ बेली! दीप-तारक बाल़ दूं।।१
चांदणौ चमचम झरे है आभ सूं,
आव पुरसै हेत रौ रस थाल़ दूं।।२
बेलियों रे थाल़ भोजन लापसी,
वाडकी भर घी जिकण पर वाल़ दूं।३
घोडलां नें नाज पाणी खूब द्यूं,
सांढण्यां रे बांध घूंघरमाल़ दूं।४[…]

» Read more

ग़ज़ल: नुवे बरस री जै माताजी

पंडित!, फादर!, ग्यानी!, काज़ी!,
नुवे बरस री जै माताजी!१
रहो जीतता सदा बेलियाँ,
जीवन री चौसर री बाजी!!२
रेय आप रे खुशी खेलती,
करे कृपा घर करनल माजी!!३[…]

» Read more

गज़ल: उधारे आंसुओं का भार

उधारे आंसुओं का भार तुम कब तक उठाओगे,
उसूलों से अदावत को कहो कैसे निभाओगे।

किसी के गमजदा किस्से दिलों से निकलती आहें,
अगर सुन भी तनिक लोगे तो हँसना भूल जाओगे।

निभाना है निभालो तुम अभी दस्तूर रोने का,
हकीकत सामने आई कि रोना भूल जाओगे।[…]

» Read more

ग़ज़ल – जब जब मौसम – राजेश विद्रोही (राजूदान जी खिडिया)

जब जब मौसम में तब्दीली होती है।
सुबह सुरीली शाम नशीली होती है।।
मंजिल से बाबस्ता होती जो राहें।
वो राहें अक्सर पथरीली होती हैं।।
जब जब मेरी दांयीं आंख फड़कती है।
मां की आंखें तब तब गीली होती है।।[…]

» Read more
1 2 3 4 5 7