करणी माँ का गीत साणोर

।।गीत – साणौर।।
धिनो धाबळा-धारणी करनला धिराणी,
धिनो देसाणपत धजा धारी।
अवन पर अवतर्या उबारण सेवगां,
मावड़ी मदद कर हमें म्हारी।।

जानकी तणी अरदास सुण जकी तूं,
थकी नां समंदां पार थाई।
पाहनां तणां पुळ तिराया तोय पै,
अम्बिका राम रै मदद आई।।[…]

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गीत प्रहास साणौर – राजबाईसा समना रौ

रटूं रसण अठ जाम शुभनाम तव राजला
कृपाळू दास रा काम कीजे।
विमळ सुखधाम मढ समन्ना विराजत
दरस वरियांम अभिराम दीजे।।01।।

विनायक रखाजे विमळ मति वीसहथ
सहायक रहीजे सुराराणी।
नलायक हूंत नंह जुड़ाजे नेहपण
बिना हक बुलाजे नांह बाणी।।02।।[…]

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गीत तेमड़ाराय रो

।।गीत-प्रहास साणोर।।
करां झूल़ तिरशूल़ ले चढै तूं केसरी,
लेसरी नहीं अब ढील लाजै।
हेर सत सेवगां सीर हरमेसरी
ईसरी नेसरी भीर आजै।।1

भगत रा देख नित मनां रा भावड़ा,
तावड़ा, छांह कर तुंही टाल़ै।
मदत तैं आजलग करी नित मावड़ा,
पेख मग आवड़ा बो ई पाल़ै।।2[…]

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चाळराय चाळकनेची रो डिंगळ गीत – कवि केसरदानजी खिडिया

॥गीत – प्रहास साणोर॥
चरै मां संदशा करै डसण विधि चोगणी,
खसण विध नोगणी धरै खूनां।
सोगणी खितारै धाक चढि आसुरां,
जोगणी चितारै वयण जूनां॥1॥

आज म्है आविया माढ पग अबरखे,
डबर कै छांडि पग मती डागो।
दीसहत खबर कै घणो जग देखसी,
बीसहथ जबर कै देखि बागौ॥2॥[…]

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गीत कोठारियां री अनीति रौ – जनकवि ऊमरदान लाळस

ऐक गीत उमरदानजी लाऴस री दबंगता दरसावतो, जिणमें तीन कोठारी बाणियां रा माजाया भाई, चारणां रा मुंदियाड़ ठिकाणा में घणी रापटरोऴ मचाय लूटणो शुरु करियो अर बठां रा ठाकुर साहब चैनसिंहजी बारहठ ने घणा दुखी करिया। सेवट आ बात उमर कवि कनै पूगी। कवि मारवाड़ रा तत्कालीन मुसाहब आला सर प्रताप रा खास मानिता हा, वै निडरता दिखावता थका बाणियां रो हूबोहूब गीत बणाय सर प्रतापसा ने खऴकायो अर कोठारियां री कामदारी ने खोस जेऴ में न्हाक मुंदियाड़ ने बचाई।

।।गीत – बड़ी सांणौर।।
पुत्र वणक त्रहुं भ्रात अन्याव रा पूतळा,
छिद्र कलकता तक न को छांनां।
जुलम री करी वातां जिके जणावूं
कळपतरु सुणीजे पता कांनां।।1।।[…]

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परभड़ा वीरगत तिहारी परणमू

।।गीत-प्रहास साणोर।।

वहा! वहा! धर शेरगढ कूख धर बंकड़ां,
निडर नर निपजणी ओल़ नामी।
गोग रा वंशधर गाढ में गर्विला,
थल़ी रा मरद रण खाग थामी।।1

जिणै छतरांणियां जाहर नर जगत में
दियण धिन नाहरां टकर देखो।
वाहरां गयोड़ी भोम रा वीरवर
एक सूं आगल़ा एक एको।।2[…]

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परिचय: राजकवि खेतदान दोलाजी मीसण – प्रेषित: आवड़दान ऊमदान मीसण

चारण समाज में ऐसे कई नामी अनामी कवि, साहित्यकार तथा विभिन्न कलाओं के पारंगत महापुरुष हुए हैं जो अपने अथक परिश्रम और लगन के कारण विधा के पारंगत हुए लेकिन विपरीत संजोगो से उनके साहित्य और कला का प्रसार न हो पाने के कारण उन्हें जनमानस में उनकी काबिलियत के अनुरूप स्थान नहीं मिल पाया। अगर उनकी काव्य कला को समाज में पहुचने का संयोग बेठता तो वे आज काफी लोकप्रिय होते।

उनमे से एक खेतदान दोलाजी मीसण एक धुरंधर काव्य सृजक एवं विद्वान हो गए है।[…]

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महादेवी देवलजी रो गीत

।।गीत प्रहास साणोर।।
भलै सोढवत धरै तूं अवतरी माड भू
साच मन ईहगां वाच सेवी
वीरी तणै उदर रमी तूं बीसहथ
देवला रूप हिंगल़ाज देवी१
साहल़ां सांभल़ै बधारै संतजन
देव जस जगत मे लियै दाढा
ऊजल़ा संढायच किया कुल़ ऊपनी
ऊजल़ा नांनाणै किया आढा२
मोद तो ऊपरै करै इल़ माड़वो
सोढ री ऐल़ ओलाद सारी
चाढियो नीर चहुं पखां कुल़ चारणी
धिनो बण मानवी देह धारी३[…]

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गीत तेमड़ाराय रो

।।गीत-प्रहास साणोर।।
करां झूल़ तिरशूल़ ले चढै अब केहरी,
ऐहरी बगत में भीर आजै।
दूथियां सरब सुख सिमरियां देहरी,
लालधज मेहरी साथ लाजै।।1
भगत रा देख नित मनां रा भावड़ा,
तावड़ा, छांह कर तुंही टाल़ै।
मदत तैं आजलग करी नित मावड़ा,
पेख मग आवड़ा बो ई पाल़ै।।2[…]

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गीत जोरावरपुरा माताजी रो

डीडवाना के पास एक गाँव है जोरावरपुरा। अमरावत बारठों का गाँव है। वहां के चमत्कारी करनी मंदिर के दर्शन करके मां के चरणों में एक गीत निवेदन –

।।गीत साणौर।।
करै खास अरदास सब दास सुण करनला
आस कर आपरै द्वार आया।
मन्न में जास विश्वास अत मावड़ी
देविका रखाजे परम दाया।।
बळू तू कळू में रहीजे बीसहथ
चळूनद सोखणी मात चंडी।[…]

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