चाल़कनेची का प्रहास शाणोर गीत – मीठा मीर डभाल

सरव परथम समरण मात तो शारदा,
रदे बीच भरोसो अडग राखूं !!
जीभ पर बिराजो आप मां जोगणी,
भवां चाळराय रा गुण भाखूं !!1!!
आप अम्ह बुद्धि बगसावजो आवड़ा,
करनल्ला मात तो महर कीजो !!
आपरो नाम लिय कर रहयो आपदा,
दयाळी उकत सध आप दीजो !!2!![…]

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देवकी उदर में प्रगटियो डीकरो

।।गीत-प्रहास साणोर।।
कड़ाका आभ दे बीजल़ी जबर कड़कड़ी,
धड़धड़ी कंसरी धरण धूजी।
हड़बड़ी दूठ रै वापरी हीयै में
पुनी जद गड़गड़ी खबर पूजी।।1
देवकी उदर में प्रगटियो डीकरो,
असुर तो मोत रो रूप आयो।
ईधर न ऊबरै उधर नह ऊबरै
जबर वसुदेव ओ सुतन जायो।।2[…]

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रूंख रिछपाळ री करो रिच्छा – पुष्पेन्द्र जुगतावत पारलाउ

।।गीत बडो साणोर।।
परम आसरो पामियो अठे नित पंथिये,
चरम त्रिप्ती थई पूर्ण इंछा।
बावळां नरम नाजुक घड़ी विचारो,
रूंख रिछपाळ री करो रिच्छा।
इये ने राखियों टळै दर आपदा,
सदा चाकर रहै पवन वरसा।
प्राणदा हरित ने पोखजो प्राणियों,
कुदिन निवडे़ हुवे सुखी करसा।

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वाह भड सांदू वाह!

आज रे भौतिकता वादी जुग में ई राजस्थान री इण पावन धरा रे मांय दान री परंपरा री अनवरत गंगा चालू है। जो आदू समै री गंगोत्री सूं कल कल करै है। इण रो परिचय सोशियल मीडिया रे मांय अबार ई थोडा दिन प्हैली वियोडी एक घटना है जिकण औ सिद्ध कर दियौ के आदू पुराणी दान अर दातारी री बातां कोइ दंतकथा या महज किस्सा कहाणी नी हा पण बे चीजां आखर आखर साच ही।
आज मैं बात मांडणी चावूं हूं एक निजानंदी कवि अर घोडां रा सौदागर नीतिराज सिंह सांदू सिहु री जिकण घोडी रो दान एक गुणी कवि मीठे खांजी मीर नें देयर पुराणी दान री परिपाटी नें पुनर्जिवीत करण री कोशिश करी।

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प्रहास शाणोर बिरखा रो

प्रहास शाणोर बिरखा रो
उरड़ियो आज उतराध सूं ऐरावतपति
खरै मन उमड़ियो बहै खातो।
गहरमन नाज अगराजतो घुमड़ियो
मुरड़ियो काल़ रो देव माथो।।1

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भोपा भंडण रो गीत

गीत भोपा भंडण रो –
ऐह आंखियां लाल कर भाव हद अणावै
भगतपण जणावै देख भोपा।
सरम तज झूठ नैं साच कर सुणावै
खूब ऐ बणावै किता खोपा।। 1

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अवन पर कोपियो धणी असमान रो

।।गीत – प्रहास साणोर।।
अवन पर कोपियो धणी असमान रो अजब
अहर निस मुखां सूं अगन उगल़ै।
तड़फड़ै जीवड़ा छांह बिन तरवरां
परम ही हड़बड़ै बर्फ पिगल़ै।।1

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मधुर सुर भासणी मान माता

।।गीत प्रहास साणोर।।

उगत दे भारती ऊजल़ै आखरां अंब,
रचण छंद भगत नैं मात रीझै।
जुगत झट उपावो साहित गुण जाणवा
कवी रो सगत ओ काज कीजै।।1 […]

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सनातन धरम रक्षक महान वीर वीरमदे सोनगरा

द अलाऊदीन खिलजी सोमनाथ री लिंग लियां मदछकियो जाल़ोर री आंटीली धरा में बड़ियो तो अठै रै अडर अर धरम रक्षक शासक कान्हड़दे आपरै आपाण रै पाण खिलजी सूं खेटा कर लिंग खोसली अर माण सहित सरना गांम में थापित करी। इणी रै अजरेल अर जबरेल सपूत वीरमदे री वीरता अर सुंदरता देखर अलाऊदीन री बेटी फिरोजा रीझगी अर हट पकड़ियो कै शादी करेला तो इणी वीरम रै साथै !नीं तो कंवारी ई भली। बादशाह कान्हड़़दे नैं कैवाय़ो पण वीरमदे नटग्यो। […]

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गीत सींथल़नाथ गोरेजी रो

चारण देवी उपासक। भैरूं देवी रो आगीवाण सो चारणां रै भैरूं रो जबर इष्ट। चारण भैरूं नैं मामै रै नाम सूं अभिहित करै। मामै रै भाणजा लाडैसर सो घणै चारणां नैं भैरूं रै सजोरै परचां रो वर्णन किंवदंतियां में सुणण नैं मिल़ै। ऐड़ो ई एक किस्सो सींथल़ रा वीठू चारण नारायणसिंह मूल़ा रो है। मध्यकाल़ री बगत सींथल़ रै मूल़ां रै वास में मानदान अर नारायणसिंह दो भाई हा। नारायणसिंह रो ब्याव बूढापै में होयो। घर में कोई खास सरतर नीं हो पण इणां रै गोरै भैरूं रो घणो इष्ट। एकर मेह वरसियो पण हलोतियै रो कोई साधन नारायणजी कनै नीं। उणां गोरै रै थान में जाय धरणो दियो।[…]

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