गीत वेलियो-दारू रै ओगण रो

सरदी लग्यां पीजो मत सैणां,
निज भर रम रा घूंट निकाम।
तवै छमक पाणी पी तातो,
ओढ सिरख करजो आराम।।1
दारू पियां लागसी देखो,
जोर अहम रो वहम जुखाम।
मिटसी नहीं किणी पण मारग
नाहक ही होसो बदनाम।।2[…]

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राखण रीत पुरसोतम राम

।।गीत-वेलियो।।
लंका जाय पूगो लंबहाथां,
निडर निसंकां नामी नूर।
दसरथ सुतन दिया रण डंका,
सधर सुटंका धानख सूर।।1

अड़ियो काज धरम अतुलीबल़,
भिड़़ियो असुरां गेह भुजाल़।
छिड़ियो भुज रामण रा छांगण
आहुड़ियो वड वंश उजाल़।।2[…]

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आपारां पुरोधा, नारायणसिंहजी कविया ‘शिवाकर’

नारायणसिंहजी शिवाकर, राजस्थानी, संस्कृत, हिंदी, पिंगल़, अर अंग्रेजी में समरूप अर सम अधिकार सूं लिखणिया विद्वान मनीषी हा। उणां नैं 1987 में राजस्थानी भाषा अकादमी रो सर्वोच्च सूर्यमल्ल मीसण पुरस्कार मिलियो। उण दिनां म्है 10वीं करर 11वीं में पढे हो। रेनबो हाऊस जोधपुर में श्रद्धेय डॉ शक्तिदानजी कविया रै संयोजन में दो दिवसीय राजस्थानी साहित्यकार सम्मेलन होयो हो अर उणमें म्हनै आमंत्रित कवि रै रूप में एक म्हारो रेंणकी छंद सुणावण रो मोको मिलियो। उठै ई शिवाकरजी सूं मिलण होयो अर उणां म्हनै जिण लाड अर अपणास रै साथै ‘दुर्गादास सतसई’ दीनी। वा आज ई म्हारै कनै एक हेमाणी रै रूप में सुरक्षित है। […]

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आऊवा रो मरण-महोछब!

साचाणी आ बात मनणजोग नीं है कै मरण रो ई कोई महोछब मनावै !! पण जद आपां राजस्थान रै मध्यकालीन इतिहास नै पढां तो आपां रै साम्हीं ऐड़ा अलेखूं दाखला सावचड़ूड़ आवै कै अठै पग-पग माथै मरण महोछब मनाईज्या हा। जिण गढां में शाका हुया, उठै रै उछब रो आजरा आपां काल़जै-पीतै बायरा या संवेदनाशून्य मिनख किणी पण रूप में कूंतो नीं कर सकां। धधकती झाल़ां में सोल़ै सिंणगार सज आपरो अंग अगन नै सूंपणो आपां री समझ में नासमझी हुय सकै पण जिणां री मा सेर सूंठ खाय थण चूंगाया या जिकै डोढ हाथ रो काल़जो राखता वै ई आ बात जाणता कै वै कितरै गीरबै रो काम कर’र आवणवाल़ी पीढ्यां रै सारू स्वाभिमान, कुलीनता अर गरिमा रो वट ऊगाय’र जा रह्या है।[…]

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नर ग्या चढा वँश रै नीर

गीत वेलियो
पत री बह राह अपत नै परहर, सत री कह समझनै सार।
कूड़ी कथ त्याग भजै किरता, सो जन लेवै जनम सुधार।।१

हर रो नाम राख हिरदै में, गलवै मधुर उचारै गीत।
भल वै बज्या सांप्रत भाई, जो वै गया जमारो जीत।।२ […]

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भगवत ओ नाय रटै घट भोदू

गीत वेलियो
भगवत ओ नाय रटै घट भोदू, नटका नको चितारै नाम।
पड़सी फंद चौरासी पितलज, कर र्यो कुटल़ बुरोड़ा काम।।१

ठग चाल़ै चोरी मन ठायो, परधन हड़फ करण में प्रीत।
जो तूं करै जमारो जायो, चित राघव ना लायो चीत।।२ […]

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गिणिया दिन तो गया गिमार

गीत वेलियो
ठगपण रै मांय मुलक नै ठगियो
धन कियो भेल़ो हर धूत।
आडो नाय सिल़ी सम आयो
जमड़ां जदै मेलिया जूत।।१

चोरी करण रख्यो घण चेतो
जारी मांय लगायो जीव।
भूल गयो भगवत नै भोदू
नरकां तणी लगाई नीव।।२ […]

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