आई शैणलमां रो गीत – कवि नाथूराम लाळस

आई शैणल जुडियै थह उभी, खाग भुजां बऴ खंडी।
प्रगळ हुवै नव नैवज पूजा, चाचर भूचर चंडी॥1॥

खप्पर भरै सत्रां पळ खाचण, हाथ त्रशूळ हलावै।
सेवग साद सुणंता शयणी, उपर करवा आवै॥2॥

विखमा डमरु डाक वजंती, वाघ चढी वेदाई।
दोखी दु:ख पावै जिण दीठां, सुख पावै सरणाई॥3॥[…]

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करणी मां रो आवाहण गीत – जंवाहरजी किनिया सुवाप

किनी किम जेज इती किनीयांणी,धणियांणी नंह और धणी।
खाती आव रमंती खेला,वेळा अबखी आण बणी॥1॥
अवलंब नहिं आप विण अंबा,जगदंबा किणनै कहुं जाय।
म्हारै जोर आपरो मोटो,धाबळवाळ सुणें झट धाय॥2॥
सात दीप हिंगळाज शगत्ति,मनरंगथळ धिन माता।
सांभळ अरज कहै इम सुकवि, खेड पधारो खाता॥3॥[…]

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🌺ओल़्यू🌺

बालमजी नें जाय कहिजो रे आवो म्हारै देस!
ओल़्यू थांरी आवे म्हानैं रे छोडो परदेस!!

बागां में कोयल बोले रे, भँवरा भटकेह!
पण थां बिन पुरी प्रथमी रे, खाविंद खटकेह!!
एकर अरजी म्हानौ मारी रे छोडो परदेस रे थें छोडो परदेस!
बालमजी नें जाय कहिजो रे आवो म्हारे देस![…]

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रामदेव पीर आवाहन

🌺रामादेव पीर आह्वान🌺

रामा! बाट निहारूं थांरी।
आवो बेगा अलख धणी, हे लीले रा असवारी!

वीरमदे सुगणा रा वीरा, अजमल सुत अवतारी!
मेणादे रा लाल लाडला, नेतल तो घर नारी! १

रामा! बाट निहारूं थांरी।
आवो बेगा अलख धणी, हे लीले रा असवारी!

सिर धर सुंदर पाग सुरंगी, पीतांबर तन धारी!
जरकसी जामा प्हैरै ठाकर, अलख पुरूष अलगारी! २[…]

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खोडियार मां रो डिंगळ गीत – कवि दादूदान प्रतापदान मीसण

तट हिरण रे वासो थारो।
धरो गाजै जठै इक धारो
तरवर फूलां वास तिहारो।
महके वायु रो मंहकारो॥1॥
झरणां मह झणकार करै थुं।
नीर विच घेरो नाद करे थुं
वगडा मंह वनराई घटा थुं।
लाल गुलाबी वेलि लता थुं॥2॥[…]

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महाराणा प्रताप रौ जस – स्व श्री भंवरदान “झणकल़ी”

उतर दियौ उदीयाण दिन पलट्यौ पल़टी दूणी।
पातल़ थंभ प्रमाण़ शैल गुफावा संचरीयौ।

मिल़ीयौ मैध मला़र मुगला री लशकर माय।
कलपै राज कुमार मैहला़ चालौ मावड़ी।

महल रजै महाराण कन्दरावा डैरा किया।
पौढण सैज पाखांण हिन्दुवां सुरज हालीया।

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ख्यात आईनाथ री अनोपो वखाणे-अनोप जी वीठू

श्री सुरसती गणपति वृहसपति शारदा,उकति सम्मपो अन्नदाता।
सापतातम्म री वारता सुणावां,मोतीवाळी हुई जगत माता॥1

हेमाळा पहाड सुं निसरे हालतो,गळियोडा बरफ रो नीर गोटो।
हिंद अर सिन्ध रै बीच मंह होयनै,मोतियां भरोडो पेट मोटो॥2

तिब्बत कम्बोज सुं उतरे ताकडो,हाकडो नांम दरियाव हाले।
घिरोळा देवतो बण्यो घण घमंडी,रतन रतनाकरो मांय राळै॥3 […]

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