म्हारै कानां रा लोल़िया तोड़ै! तो तोड़ लेई!!

बीकानेर रो सींथल़ गांम रोहड़ियां रो कदीमी सांसण। सांसण गांम में राज रो कोई दखल नीं अर जै कोई राज रै जोम में दखल देवण री कोशिश करतो तो सोरै सास उठै रा वासी इण बात नै सहन नीं करता अर आपरो ठरको कायम राखण नै मर पूरा देता। ऐड़ी ई एक बात है सांसण गांम री टणकाई सारू मरण अंगेजण री।

बात उण दिनां री है जिण दिनां बीकानेर माथै महाराजा रतनसिंह रो शासन हो। उणां री सेना में रिड़मलसर-सागर रो एक सिपाही-मुसल़मान नूरदीन किणी छोटे-मोटै पद माथै चाकरी करतो। वो एक दिन आपरै दस-पंद्रह जिणां साथै बैतो सींथल आयो अर विंसाई खावण सारू ठंभियो। उणी बखत रुघाराम नाई रछानी (नाई का समान) लियां कनैकर निकल़िया। नरदीन उणांनै हेलो कियो कै – “इनै आ रे!”[…]

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गीत लाछां माऊ रो

।।गीत – प्रहास साणोर।।
अमर कथ करेवा पैंड जस भरेवा अहो,
समर हर नाम कर काम साचां।
मंडेवा गुमर इम नेसड़ां महिपर
लोवड़धर जचायो जमर लाछां।।1

रतनुवां दैण धिन कीरती रसापर,
धूरतां असा कज मोत धीबी।
आदलग जसा ही रीत रख इल़ा पर
जगत में बसा गी सुजस झीबी।।2[…]

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जसोड़ां रा बूंठा छोड देई

दिन अर दशा हरएक री बदल़ती रैवै, इणी कारण इणनै घिरत-फिरत री छिंयां कैयो गयो है। जिकै जसोड़ कदै ई जैसलमेर में जोरावर होता, जिणां रो राज में घातियो लूण पड़तो पण सगल़ी मिनखां री माया रा प्रताप हा!कृपारामजी खिड़िया सटीक ई लिख्यो है कै-

नरां नखत परवांण, ज्यां ऊभां संकै जगत।
भोजन तपै न भांण, रांवण मरतां राजिया!!

ज्यूं-ज्यूं मिनखां रो तोटो आयो, ज्यूं-ज्यूं जसोड़ पतल़ा पड़िया अर त्यूं-त्यूं उणां रो मरट मिटतो ग्यो।[…]

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वीरां माऊ वंदना

सिरुवै जैसल़मेर रा रतनू हरपाल़जी समरथदानजी रा आपरी बगत रा स्वाभिमानी अर साहसी पुरस हा। इणां री शादी रतनुवां रा बही राव, रावजी पूनमदान नरसिंहदानजी बिराई रै मुजब गांम सींथल़ रा बीठू किशोरजी डूंगरदानजी रां री बेटी वीरां बाई साथै होई।

जद जैसलमेर रा तत्कालीन महारावल़ जसवंतसिहजी (1759-1764वि)अर भाटी तेजमालजी रामसिंहोत रै बीच अदावदी बढी उण बगत हरपालजी ई भाटी तेजमालजी रै साथै हा। महारावल़ अर भाटी तेजमालजी रै बिचाल़ै हाबूर री गेह तल़ाई माथै लड़ाई होई उण बगत भाटी तेजमालजी संजोगवश निहत्था सो वीरगति(1763वि.बैसाग 8)नै पाई। (संदर्भ जैसलमेर भाटी शासक उनके पूर्वज एवं वंशजों का क्रमबद्ध स्वर्णिम इतिहास-गोपाल सिंह भाटी तेजमालता) महारावल़ उणां री पार्थिव देह नै अग्नि समर्पित करण सूं सबां नै मना कर दिया। उण बगत रतनू हरपालजी हाबूर ऊनड़ां साथै मिल़र महारावल़ री गिनर करियां बिनां दाग दियो-

झीबां पाव झकोल़िया, उडर हूवा अलग्ग।
पह रतनू हरपाल़ रा, प्रतन छूटा पग्ग।।[…]

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सूरमदे सुजस

।।गीत-प्रहास साणोर।।
धिनो गोर आलोत रै प्रगट भांडू धरा,
चाढणी सरासर सुजल़ चंडी।
बराबर दिपै तूं हेमजा बीसहथ,
मुरधरा रोहड़ां जात मंडी।।10

सईकै चबदमै इकावन साल सुध,
मही धिन आलरी पवित मांडू।
सूरमदे नाम जन जाणियो सांपरत,
भवा तन धारियो आय भांडू।।11[…]

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आऊवा रो मरण-महोछब!

साचाणी आ बात मनणजोग नीं है कै मरण रो ई कोई महोछब मनावै !! पण जद आपां राजस्थान रै मध्यकालीन इतिहास नै पढां तो आपां रै साम्हीं ऐड़ा अलेखूं दाखला सावचड़ूड़ आवै कै अठै पग-पग माथै मरण महोछब मनाईज्या हा। जिण गढां में शाका हुया, उठै रै उछब रो आजरा आपां काल़जै-पीतै बायरा या संवेदनाशून्य मिनख किणी पण रूप में कूंतो नीं कर सकां। धधकती झाल़ां में सोल़ै सिंणगार सज आपरो अंग अगन नै सूंपणो आपां री समझ में नासमझी हुय सकै पण जिणां री मा सेर सूंठ खाय थण चूंगाया या जिकै डोढ हाथ रो काल़जो राखता वै ई आ बात जाणता कै वै कितरै गीरबै रो काम कर’र आवणवाल़ी पीढ्यां रै सारू स्वाभिमान, कुलीनता अर गरिमा रो वट ऊगाय’र जा रह्या है।[…]

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लाख़ा जमर रौ जस – स्व श्री भंवर दान झणकली कृत

किरनाल़ कुल़ रौ कलंक राजा,कंश बनकर कौफीयौ।
निकलंक गढ़ जौधाण़ रौ नव कुंगरौ नीचौ कीयौ।
माॉघण़ा छौड़ौ दैश मुड़धर, हुकम घरघर हाल़ीया ।
धनवाद चारण़ जात उण दिन लाख जीवण जालिय़ा ।[…]

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उम्मेदां माजी

उम्मेदां माजी रो पीहर मोटेई(फलोदी)अर दासोड़ी सासरो हो। आप री जात बीठू ही। सांगड़ सूं बीठू आय इण गाव मे बसग्या हा। अठैरे किण ठाकुर इण बीठुवां नै जमी दी ओ ठाह नी है अर नीं ओ ठाह है कै इण बीठुवां रो किण ठाकुर साथै जमी रो विवाद होयो। ओ मोटेई पातावतां री जागीर रो गांव हो। बीठुवां रे किणी खेत नै लेय ठाकुर सूं वाद बढग्यो। ठाकुर रा आदमी आया अर खेत जोत दियो। चारणां घणा ई समझाया पण पार नी पड़ी छेवट बात जमर तक पूगगी। प्रश्न उठियो कै जमर करे कुण? पण जमर री बात किणी […]

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गौ भक्त मा पेमां

बीकानेर रै आथूणै कड़खै रो छे’लो गांव है दासोड़ी। इण गांव रै आथूणै अर उतरादै पासै जोधपुर रो अंतिम गांव है मिठड़ियो। मिठड़ियै री लागती कांकड़ माथै आयोड़ा दासोड़ी रा खेत करनेत बाजै। लगै टगै वि.सं. १८०० रे आसै पासै दासोड़ी मे पेमां माजी होया। दासोड़ी उणां रो ससुराल हो। पीहर किण जागा हो ओ तो ठाह नी है पण बै जात रा बीठवण (बीठू) हा। आ बात म्हारा जीसा (दादोसा) गणेशदानजी रतनू कैया करता हा। पेमा माजी रे गायां घणी होती सो बै आपरै खेत करनेत ढाणी विराजता। उण दिनां मिठड़ियै रो ठाकुर कल्लो पातावत हो। ठाकुर री कुदीठ माजी […]

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तूं किणी गढ नै टिल्लो दीजै!!

माड़वो(पोकरण)आपरी सांस्कृतिक विरासत रै पाण चावो गांम रैयो है। इणी गांम में महाशक्ति देवल रो जनम होयो। इणी धरा नै बूट बलाल बैचरा जैड़ी महाशक्तियां रो नानाणो होवण रो गौरव प्राप्त है। इणी धरा री मा चंदू माड़वा गांव री रक्षार्थ अखेसर री पावन पाल़ माथै पोकरण ठाकुर सालमसिंह रे खिलाफ १८७९ वि° मे जमर कियो। चंदू मा सूं पैला इणां री मा अणंदूबाई, गुड्डी रै पोकरणां रै खिलाफ जमर कियो। जद इण गांम री ऐ गर्विली गाथावां सुणां तो लागै कै शायद इण माटी में ईज ऐड़ो आपाण भर्योड़ो हो कै अठै रो वासी आपरै माण नै मुचण नीं […]

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