जोधपुर स्थापना और पूर्व पीठीका !! – राजेन्द्रसिंह कविया संतोषपुरा

…किले की नींव का प्रथम शिलास्थापन भवभय भंजनी भगवती करनल किनियाँणी के कर कमलों द्वारा कराकर आगत अदृष्य अनिष्ट से अपने पीढीयों को आरक्षित करने के उद्देश्य से अमराजी चारण को माता जी को आंमत्रित कर के लाने हेतु भेजा व जब जगदम्बा पधारी तो उनके हाथो से वि. सं. १५१५ जेष्ठ माह की उजऴी ग्यारस को दुर्ग की स्थापना करवायी।

पन्दरा सौ पन्दरोतरै, जेठ मास जोधाण।
सुद ग्यारस वार शनि, मंडियो गढ महराण।।

मारवाड़ के प्रसिन्द इतिहासकार पं. विश्वेश्वरनाथ रेउ ने लिखा है कि ख्यातों मे लिखा है कि करनीजी नाम की चारण जाति की प्रसिध्द महिला द्वारा किले का स्थान बताया जाना व उसीके द्वारा उसका शिलारोपण होना भी लिखा है।…

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श्री करनीजी ने दी #महराणगढ़ की नींव

…यही नहीं ऐसे इतिहासकारों ने ऐतिहासिक व सांस्कृतिक संदर्भों को भी जनमानस की स्मृति से हटाने हेतु अपने इतिहास ग्रंथों में शामिल नहीं किया।

ऐसा ही एक सांस्कृतिक गौरव बिंदु है जोधपुर गढ़ की नींव करनीजी के हाथों निष्पादित होना।

डिंगल काव्य सहित कई जगह इस बात के संदर्भ मिलते हैं लेकिन आधुनिक इतिहासकारों में केवल किशोरसिंहजी बार्हस्पत्य को छोड़कर अन्य किसी ने इस महनीय बिंदु को उल्लेखित नहीं किया।[…]

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बीसहथ रा सौरठा – रामनाथ जी कविया

उभी कूंत उलाळ, भूखी तूं भैसा भखण।
पग सातवै पताळ, ब्रहमंड माथौ बीसहथ।।१
सौ भैसा हुड़ लाख, हेकण छाक अरोगियां।
पेट तणा तोई पाख, वाखां लागा बीसहथ।।२
थरहर अंबर थाय, धरहरती धूजै धरा,
पहरंता तव पाय, वागा नेवर बीसहथ।।३
पग डूलै दिगपाळ, हाल फाळ भूलै हसत।
पीड़ै नाग पताळ, बाघ चढै जद बीसहथ।।४
करनादे केई वार, मन मांही कीधो मतो।
हुकुम बिनां हिकवार, देसाणों दीठौ नहीं।।५[…]

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करनी जी – सुरेश सोनी (सींथल)

सन् 1386 की बात है।

जोधपुर जिले के सुवाप गांव में मेहाजी किनिया के घर उत्सव का माहौल था, क्योंकि उनकी पत्नी देवल देवी आढ़ा के छठी सन्तान होने वाली थी तथा पहले से पांच पुत्रियों के होने के कारण इस बार सभी को पूरा विश्वास था कि पुत्र ही होगा और इस सम्बन्ध में उत्सव की समस्त तैयारियों के साथ दो दाइयों मोदी मोलाणी व आक्खां इन्द्राणी को भी बुलवा लिया गया था।

परन्तु न केवल वह दिन बीत गया, बल्कि सप्ताह व माह भी बीत गया।

इस प्रकार नौ माह बीत जाने के बाद भी प्रसव नहीं हो रहा था, जिससे सभी बेहद चिन्तातुर हो उठे थे। धीरे-धीरे एक-दो नहीं वरन दस माह और बीत गए, मगर फिर भी प्रसव नहीं हुआ।[…]

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श्री करणी माता का इतिहास – डॉ. नरेन्द्र सिंह आढ़ा

श्री करणीमाता के पिता मेहाजी जो किनिया शाखा के चारण थे। उनको मेहा मांगलिया से सुवाप नामक गाँव उदक में मिला था, जो जोधपुर जिले की फलौदी तहसील में पडता है। मेहाजी को सुवाप गाँव मिलने से पहले यह गाँव सुवा ब्राह्मण की ढाणी कहलाता था। बाद में मेहाजी ने इस गाँव का नाम बदलकर सुवाप रखा था। इसी गाँव में लोकदेवी श्रीकरणीमाता का जन्म हुआ।

मेहाजी किनिया का विवाह बाड़मेर के मालाणी परगने में अवस्थित वर्तमान बाड़मेर जिले के बालोतरा के पास आढ़ाणा (असाढ़ा) नामक एक प्राचीन गाँव के स्वामी माढा आढ़ा के पुत्र चकलू आढ़ा की पुत्री देवल देवी के साथ हुआ था। कुछ लोग इस प्राचीन गाँव का उल्लेख जैसलमेर की सीमा पर स्थित ओढाणिया गाँव के रूप में भी करते है जो कि एक शोध का विषय है। निष्कर्षतः यह विवाह वि.सं. 1422-23 के आस-पास हुआ था। इस आढ़ी देवल देवी को भी चारण जाति में शक्ति का अवतार माना जाता है।[…]

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मां करणी जी रो गीत – कवि खेतसी बारट मथाणिया कृत

।।गीत।।
विमल देह धारीयां सगत जांगल धर विराजै,
थांन देसांण श्री हाथ थाया।
उठै कव भेजियो राज करवा अरज,
जोधपुर पधारो जोगमाया।।१।।

विनती सुणै रथ जुपायो बेलीयां,
सहस फण सेलियां जदन सारा।
तेलीयां वीर सुत वाजता टांमका,
लाख नव फैलीया व्यूह लारा।।२।।[…]

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गीत मथाणियाराय रो

।।गीत मथाणियाराय रो।।
।।गीत।।
अमर दूदहर आवियो तेड़वा ईसरी,
मया कर जोध पर आज माता।
सार कर रिड़ै-तण काज गढ सारजै,
निजर भर इमी री पाल़ नाता।।1[…]

xt-align: center;”>पहर एक प्रभात रा, अमर रुकूँली आंण।
प्रण पूरै प्रमेश्वरी, मरूधर नगर मथांण।।

।।गीत।।
अमर दूदहर आवियो तेड़वा ईसरी,
मया कर जोध पर आज माता।
सार कर रिड़ै-तण काज गढ सारजै,
निजर भर इमी री पाल़ा नाता।।1[…]

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भांजण भीड़ भगतन री – करनीजी री चिरजा

भांजण भीड़ भगतन री मदत सजै मेहाई।।टेर।।

पड़तां कूप कारीगर कूक्यो
साद सुणै सुरराई
सांधो दियो बरत रै सगती
बोगी बण बरदाई।।१
भांजण भीड़ भगतन री मदत सजै मेहाई।।[…]

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