जोग माया रो गीत सपाखरु – कविराज लांगीदास जी

देवी झंगरेची, वन्नरेची, जळेची, थळेची देवी;
मढेची, गढेची देवी पादरेची माय।
कोठेची वडेची देवी सेवगाँ सहाय करे,
रवेची चाळक्कनेची डूँगरेची राय।।1[…]

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देवी स्तुति

जय जग जननी! आसुर हननी! विश्व विनोदिनी! अंबा!
जगत पालिनी देवि! दयालिनी!, ललिता! मां! भुजलंबा!!१

विपद विदारिणी! त्रिभुवन तारिणी! नेह निहारिणी! करणी!
पातक हरणी! अशरण शरणी! तारण भव जल तरणी!!२

सिंहारूढ! अगम अतिगूढा! सकल सुमंगल दानी!
वंदन बीसभुजी! वरदायिनि!, भैरवी! भवा! भवानी!!३[…]

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नवदुर्गा वंदना – कवि स्व. अजयदान जी लखदान जी रोहड़िया मलावा

शैलपुत्री जय शिवप्रिया, प्रणतपालिनी पाहि।
निज अपत्य टेरत तुझे, त्राहि त्राहि मां त्राहि।।१
जयति जयति ब्रह्मचारिणी, बीज सरूपिणी बानि।
विषम समय पर राखिये, प्रियजन के सिर पानि।।२
चारू चंद्र घंटा सुमति, प्रणति देहु कर प्रीति।
भवभय भंजनी भंजिए, ईति, भीति अनीति।।३
कुषुमांडा बिनती करत, सेवक करहु सुयोग।
कल्याणी अरु काटिये, कल्मष, कष्ट, कुयोग।।४[…]

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मेहाई सतसई – नरपत आसिया “वैतालिक”

मेहाई सतसई

कवि नरपत आसिया “वैतालिक” कृत

अमर शबद रा बोकडा, रमता मेल्या राज।
आई थारे आंगणैं, मेहाई महराज॥
(शब्द रूपी अमर बकरा हे माँ आई मेहाई महराज आपरा मढ रे आंगण में रमता मेल रियो हूँ।)

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आधशगति उमिया माताजी री स्तुति – कवि मुळदानजी तेजमालजी रोहडिया (जामथडा कच्छ)

।।छंद – सारसी।।
तुंही रुद्राणी, व्रहमाणी, विश्व जाणी, वज्जरा।
चाळळकनेची, तुं रवेची, डुँगरेची, छप्परा।
विशां भुजाळी, वक्र वाळी, त्रिशूळाळी त्रम्मया।
वेदां वदंती, सारसत्ती, आध शगति उमिया।।1[…]

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આઈ કામબાઈ (आई कामबाई) – ઝવેરચંદભાઈ મેઘાણી

જાંબુડા ગામના ચારણો ઘોડાની સોદાગરી કરતા આઠ મહિના દેશાવર ખેડી ખેડી ચોમાસુ ઘરને આંગણે ગાળતા. કંકુવરણી ચારણિયાણીઓ દુઝાણાં વાઝાણાં રાખીને ઘરનો વહેવાર ચલાવતી, ઉનાળાની શીળી રાતે રોજ રાસડે ઘૂમતી અને ગામનાં, ગામધણીનાં, રામનાં ને સીતાનાં ગીતો ગાતી કે- જામ! તારું જાંબુડું રળિયામણું રે પરણે સીતા ને શ્રી રામ આવે રાઘવ કુળની જાન. – જામ. પ્રભાતનો પહોર ઉગમણી દિશામાં કંકુડાં વેરે છે. જાંબુડા ગામની સીમ જાણે સોને ભરી છે. તે ટાણે કામબાઈ નામની જુવાન ચારણી કૂવાકાંઠે બેડું ભરે છે. કાળી કામળીમાં ગોરું મોં ખીલી રહ્યું છે. ઉજાગરે રાતી આંખો હીંગળેભરી ભાસે છે. એની આંખો તો રોજની એવી રાતીચોળ રહેતી: લોક કહેતા […]

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जोगमाया रो सपाखरु गीत – कवि बेणूजी

।।गीत-सपाखरु।।
काळी कामाखा कृष्णा कळा कमळ्ळा कराळी क्रोधा,
वामंगा विमल्ला बाळा वसंती विराट।
हरसिध्ध हिंगळाज हेमपुत्री हेला हरा,
मातंगी मंगळा माता मंडे मही माट।।1

कुषमंडा काळरात्र कातयणी भद्रकाळि,
साकुंभरी शैलपुत्री सोख चडा सीत।
चंद्रघंटा चंद्रेसुरी चाँवंड चाळक्कनेची,
जोगणी जगाडों ज्वाळामुखी जंगजीत।।2[…]

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