मजूरण

मजूरण रै उणियारै में प्रतख दीखतो उण विधाता रो रूप जिकै इण जग नैं रचियो पण अरपण कीधो बीजां नैं। अरे! इणी विध इण भुजां रै आपाण कई घड़िया सतखंडिया आभै सूं अड़िया बे महल जिणां रै सिरजण में समरपण कीधो इण जीवण आपरो जोबन सारो विसरी ममता मिसरी सी छिटकाया हांचल़ रा फूल उजाड़्यो घर बिगाड़्यो कारज फगत इणां री नीव सीसै री करण नैं! पण ! ऐ सदियां सूं नुगरा साथी स्वारथ रा कद पाल़ै हा प्रीत पूरबल़ी जद आ सांझ सवार रै जांदां सूं आंती मार्योड़ी मांदगी रै हाथां लड़खड़ाती बूढापै री फेट सूं भूख सूं बाथेड़ा […]

» Read more

खुद रै बदळ्यां बिना बावळा

खुद रै बदळ्यां बिना बावळा,
राज बदळियां के होसी ।
कंठां सुर किलकार कर्यां बिन,
साज बदळियां के होसी।।

कितरा राज बदळता देख्या,
सीता रै पण कद सौराई।
जनक आपरै वचन जिद्द में,
परणावण री सरत पौलाई।। […]

» Read more

न्यारै-न्यारै

न्यारै-न्यारै मिनख मनां में,
देखो न्यारी-न्यारी आग।
कठै राग अनुराग विहूणी,
कठै विराग मांयनै राग।।

बागवान ही बण्या विधूंसक,
सुरड़ै-सुरड़ विधूंसै बाग।
टणका झुरै टोपल्यां खातर।
पतहीणां सिर पचरंग पाग।। […]

» Read more

गिणिया दिन तो गया गिमार

गीत वेलियो
ठगपण रै मांय मुलक नै ठगियो
धन कियो भेल़ो हर धूत।
आडो नाय सिल़ी सम आयो
जमड़ां जदै मेलिया जूत।।१

चोरी करण रख्यो घण चेतो
जारी मांय लगायो जीव।
भूल गयो भगवत नै भोदू
नरकां तणी लगाई नीव।।२ […]

» Read more

मंत्री नै कुण मूंडियो

संसद रै इक सदन री,बात कहूं बतळाय।
मंत्री मूंड मुंडायनैं,आसण बैठो आय।।
सगळा पूछै सैन में, बोले नांय विशेष।
बीती कद आ बारता, कटिया कीकर केस।।
संवेदनवश सागलां, स्वर में धीर समाय।
पूछ्यो पूसारामजी, दूणों दुख्ख दिखाय।। […]

» Read more

मत कर

दास मत बण दौर रो,तूं-
और री कीं आस मतकर।
गौर कर इतिहास गहला,
ठौर री ठकरास मत कर।।

मायतां रै माण मांही,
हाण देखै सौ हरामी।
काण कुळ री हाथ वांरै,
देण री दरखास मत कर।। […]

» Read more

अर्जनदान मूहड़ सनवाड़ा

आदरणीय अर्जुनदानसा मूहड़ सनवाड़ा रो नाम डिंगल़ रे वर्तमान कवियां मे हरोल़ है। आपरी मोकल़ी कवितावां काव्य प्रेमियां रे विचालै चावी है। पंचायण पच्चीसी, वाह वाह विज्ञान, करणीजी रा छंद, पाकिस्तान नै चेतावणी, कश्मीर रो मामलो, वड़लै रो मर्सियो आद रचनावां अर्जुनसा रे बहु पठित अर बहु श्रुत ज्ञान री परिचायक है। डिंगल़ काव्य नै जुगबोध सूं जोड़तां थकां अर्जुनसा समकालीन साहित्य री दौड़ मे डिंगल़ नै समवड़ ऊभी करणियै कवियां मे शुमार है। “वाह वाह विज्ञान” री कीं दूहा आपरी निजर कर रैयो हूं जिण मे कवि विज्ञान रे पेटै आधुनिक विकास नै दरसायो है वाह वाह विज्ञान (अर्जुनदान […]

» Read more

जय जय भारत देश

हमको आजादी मिली, और बँट गया देश।
अब नेता बन आ गयै, नन्है बडै नरेश॥1

पहले पाकिस्तान को, बांट गयै अंग्रेज।
अब हमनें बांटा उसै,जाति पांती सहेज॥2

जाति धर्म प्रदेश से, राजै बनते रोज।
नेता कोलंबस हुए, औ सत्ता की खोज॥3 […]

» Read more

अपसूंण – चंद्रप्रकास देवल

सईकां लांबी
उण धा काळी रात रै सूटापै
सैचन्नण चांनणै
नाचण रै कोड सूं पग मांडिया ई हा
मादळ रओ आटौ थेपड़ियौ हौ आलौ कर
थाळी सारू डाकौ सोध्यौ हौ
के चांणचक म्हे-
आजादी रै मंगळ परभात
अमंगळ व्हैग्यौ ।

» Read more
1 8 9 10