अपने चारों धाम खेत में

तीर्थ-स्नान तमाम खेत में।
अपने चारों धाम खेत में।।

श्रम की पूजा सांझ-सकारे।
और न दूजा देव हमारे।
जस उसका उसके जयकारे।
सच्चे सात सलाम खेत में।
अपने चारों धाम खेत में।।[…]

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नमण धरा नागौर

नमण धरा नागौर, और कुण तो सूं आगै।
संत भगत सिरमौर, तोर जस जोती जागै।
तूँ मोटी महमाय, उदर मीरां उपजावै।
गुण गोविंद रा गाय, दाय नह दूजो आवै।
जहं सूरवीर पिरथी सिरै, (अरु) देव-देवियां अवतरै।
गजराज आज घण गरब सूं, (थनै) क्रोड बार वन्दन करै।। 01।।[…]

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मंदोदरी-सूर्पणखा संवाद – बांकजी बीठू

मंदोदरी उवाचः……
ज्वाऴा लगाई कपेश लंक मंदोदरी बोली जठै,
लंका तणो कोट भाई-बैन लेख।
कठै सिया हेर आई नाक कांन लेर आई,
वऴै साई देर आई लंका री विसेख।।1।।

सूर्पणखा उवाचः…….
भोजाई विचार बोल म्हनै ई कहै छै भूंडी,
जांणै नहीं बात उंडी म्हांरै सांमी जोय।
डुलंती द्वै वाट वीच प्रिथी में फूटगी डूंडी,
सांमियां री मूंडी जिका नाक काटै सोय।।2।।[…]

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अम्मा तेरी है क मेरी

आ दुनिया अलबेली है। इणमें बडाबडी रा डेरूं बाजै। अेक सूं अेक उपरला पीर पैदा हुवै। हर मिनख खुद नैं दुनिया रो सबसो स्याणो अर सही आदमी मानै अर दूजोड़ां रै कामां में कमियां निकाळै। खुद री अकल माथै इधको गुमेज राखै। कई बार जाणबूझतां लोग जागतां नैं पगांथियां न्हाखण री असफळ कोसीसां करै। कई बार तो फब ज्यावै पण कई बार खुद रो वार खुद पर भारी पड़ ज्यावै। आपसूं उपरलो उस्ताद मिल्यां आंख्या चरड़-चरड़ खुल ज्यावै। नहलै पर दहलो मारणियां रो घाटो कोनी, इण खातर घणी हुंस्यारी दिखाण सूं पैली आदमी नैं सोचणो जरूर चाईजै।

आपणै अठै घरां मांय सासू अर बहू री छोटी-मोटी खींचताण आम बात मानीजै। सासू अर बहू री खींचताण में दुधारी तलवार रा रगड़का बापड़ै बीं मिनख रै लागै जको अेक रो बेटो अर अेक रो घरधणी है। बो दो पाटां रै बिचाळै पिसीजै। बात घणी बधज्यावै जणां न्यारा-न्यारा होवणो पड़ै। अेकर इयांकलै ई जंजाळ में फंस्योड़ै अेक मोट्यार राड़ आडी बाड़ करण री सोच’र आपरी मा नैं गाम में राखी अर बहू नैं शहर मांय ले आयो। पण न्यारी हुयां पछै ई बहू रै मन में सासू रै प्रति भाव सागण ई रैया। सासू-बहू रै ठीकरी में घाली ई नीं रळै। बहू आपरी सासू नैं सबक सिखावणो चावै।[…]

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सीमाड़ो वीर रुखाल़ै है

अणभै है धरती भारत री,
सीमाड़ो वीर रुखाल़ै है।

लाय सूरज री ठंडी हीलां,
गात जोबन नै गाल़ै है।।
हिमाल़ै री ऊंची चोटी ,
बर्फ मांय पग रोप्या है।
मुरधर रै ऊंनै इण धोरां
वीर सजोरांं जोप्या है।
बिखमी री वाटा ले झाटां
वीरत सूं कीरत आ खाटी।[…]

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काळ – कवि रेवतदान जी चारण “कल्पित”

आभै ऊपर भमै गिरजड़ा चिलां उड़ती जाय
पग पग ऊपर ल्हास मिनख री कुत्ता माटी खाय
लूट डकैती खून चोरियां लाय लगी तो झालौझाळ
भूख भचीडा फिरै खावती नाचै झूमै सौ सौ ताळ
सुगन चिड़ी सूरज नै पूछ्यो गिरजा नै पूछ्यो कंकाळ
धोरां नै पूछै रुखड़ला ल्हासां नै अगनी री झाळ
क्यूं मौत री मरजी माथै जीवण री पड़गी हड़ताळ
हिरणी बोली रया करै कंई रखवालां रौ पडग्यो काळ[…]

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कलमां री ताकत रै आगै

अबार रै कवियां री कलम में कितरी ताकत है? इणरै अनुमान रो दाखलो अजै सुणण में नीं आयो पण आपांरी आगली अर इणां सूं पैलड़ी पीढी रै कवियां री कलम में कितरी ताकत ही इणरा फगत तीन दाखला आपनै देय रैयो हूं [1]महाकवि पृथ्वीराजजी राठौड ‘पीथल’, [2]कवि भूषण सूर्यमल्लजी मीसण, [3]कवि पुंगव केशरीसिंहजी बारठ री वाणी रै पाणी सूं आप परिचित हो – […]

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देश भगती री जगमगती जोतः क्रांति रा जोरावर (पुस्तक समीक्षा)

(महान क्रांतिकारी केशरीसिंहजी बारठ री पुण्यतिथि माथै विशेष)
राजस्थानी भाषा रै साहित्यिक विगसाव सारु पद्य सिरजण सूं बती जरूरत गद्य रो गजरो गूंथण री है। आ बात आजरी युवा पीढी सूं घणी आपांरी पुराणी पीढी रा विद्वान सावल़सर जाणै। बै जाणै कै जितै तक आपांरी भाषा रो गद्य लेखन समृद्ध नीं होवैला जितै तक आपां भारतीय साहित्य रै समकालीन लेखन री समवड़ता नीं कर सकांला। इणी बात नैं दीठगत राखर कई विद्वानां कहाणी, निबंध अर उपन्यास लेखन कानी आपरी मेधा रो उपयोग करण अर गद्य भंडार भरण सारु ठावको काम कियो अर कर रैया है।[…]

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🌺म्हूं तो मन माने ज्यूं राचूं🌺

म्हूं तो मन मानें ज्यूं राचूं।
साँवरियो बण कागद लिख द्यूं, मीरां ह्वै फिर बांचूं।
कदे वेदना हँस हँस गाऊ, कदे खुशी में रोऊं।
मनोभाव मणिमुकता माल़ा, जोडूं तोडूं प्रोऊं।
लडियां कडियां आँच अनुभव, कर कर कुंदन जांचूं।
म्हूं तो मन मानें ज्यूं राचूं।
साँवरियो बण कागद लिख द्यूं, मीरां ह्वै फिर बांचूं।[…]

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संतो! वरे भाव री हेली!

संतो! वरे भाव री हेली!
तनडो भींज्यों मनडो भींज्यों, हरी हुई हिव वेली!
खल़कै खाल़ा, वहता व्हाल़ा, भरिया नद सरवरिया!
कोई उलीचै भर भर खोबा, डूबाणा केई तरिया!
बडी बडी झड़ लगी जोर री, नेवै धरो तपेली!
संतो वरे भाव री हेली!
तनडो भींज्यो मनडो भीज्यो हरी हुई हिव वेली![…]

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