करुं शबद रा खाजरू

मदिरा प्हैली धार री, डिंगळ री डणकार।
जाजम जमगी जोर री, आवौ सब सिरदार॥1
हुं मां रो, मां माहरी, किण रे उण सूं काह।
मन मांनै वा पुरस दूं, बिनां किया परवाह॥2
करुं शबद रा खाजरू, भाव तणी दूं धार।
पीवै माता प्रेमसूं, सदा करै स्वीकार॥3 […]

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जीवट ही जीवण है

जीवट ही जीवण रो नाम अरे, जग देख तमासो हारी ना
जूझ्या ही कीमत जीवण री, लड़तोड़ो हीमत हारी ना

चींचड़ बण चूंटै काया नै, माया रा लोभी मतवाल़ा
पग पग रे छेड़ै परड़ां है, घट घट मे काल़ा फणवाल़ा
पावै जिण प्यालां दूध बता, विसड़ै री जागा की मिलसी
हेवा कर चुल़सी पाछो तूं, झाटां अर डंकड़ा घण मिलसी […]

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कविता ना व्यापार

कवि नांही छोटा बडा, रंक किंवा उमराव।
सबकी अपनी कल्पना, अपने अपने भाव॥1
कवि कवि होता है सखे!, क्या आला क्या तुच्छ।
अपनी अपनी पसंद से, गढता पुष्पित गुच्छ॥2
कविता मन की कल्पना, कल्पक की सुकूमार।
मंचौ की महिमा नही, कविता ना व्यापार॥3 […]

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आव गज़ल थुं आव अठे

छम छम करती पांव अठे।
आव गज़ल थुं आव अठे।
मन री बातां थनें सुणादूं,
नहीं कपट रा दाव अठे।
दाद ,कहकहा ,वाह वाह री,
अपणायत अणमाव अठे।
मन रा सुर थुं मांड मुळकती,
लय री झांझ बजाव अठे। […]

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