टकै-टकै मत बेच

मोत्यां मूंघो माण जगत में
अर मोत्यां री कीमत भारी।
टकै-टकै मत बेच बावळा, आ जिंदगाणी लाख टकां री।।

लख चौरासी भटक बितायां
मिनख जूण रो मोको आवै।
करम देख करतार पूरबला
करमां सारू काज भुळावै।।
कर करणी भंूडी या सखरी
बही लिखीजै बंदा थारी।
टकै-टकै मत बेच बावळा, आ जिंदगाणी लाख टकां री।।01।।

आयो हो अठ् भाव बढ़ावण
अर तूं विष रा बीज उगावै।
जात, धरम अर सम्प्रदाय रा,
खाडा खोदै, राड करावै।।
पण तूं सुणलै काठ उनाड़ी,
नहीं पकैली खिचड़ी थारी।
टकै-टकै मत बेच बावळा, आ जिंदगाणी लाख टकां री।।02।।

आफत जिम औरत नै मानै
अर उण सूं इज्जत री आशा।
पर नार्यां हित मीठी, धीमी,
घर नारी हित कड़वी भासा।।
पण वा धीर-धरम री धारक
आफत औढ़ै सगळी थारी।
टकै-टकै मत बेच बावळा, आ जिंदगाणी लाख टकां री।।03।।

श्रद्धा रूप सदा स्वीकारी
पण कद आप बरोबर जाणी।
युग रो दरद खुदोखुद ओढ्यो
खुद रै दरद रही अणजाणी।।
माण जोग इण नार जात रो
क्यों अपमान करण री धारी।
टकै-टकै मत बेच बावळा, आ जिंदगाणी लाख टकां री।।04।।

घर आतां कर कोड घणैरा
मोत्यां थाळ बधारै।
बार-बार बलिहारी जावां
बेटी कह स्वीकारै।।
देख दायजो भड़क भूत ह्वै
प्यारी लागण लागै खारी।
टकै-टकै मत बेच बावळा, आ जिंदगाणी लाख टकां री।।05।।

सीता सी सतवंती स्याणी
रूप, रंग अर शील सुहाणी।
मात-पिता रै मन री रौनक
कोकिल कंठी मीठी वाणी।।
लालच रै बस लाय लगाई
लालच आगै लायण हारी।।
टकै-टकै मत बेच बावळा, आ जिंदगाणी लाख टकां री।।06।।

मंचां पर भाषण मन जचिया
कर-कर ताळ्यां पावै।
बेटो-बेटी एक बरोबर
कह-कह रंग जमावै।।
घर की घरणी खातर घर में
सोच तिहारी बिल्कुल न्यारी।
टकै-टकै मत बेच बावळा, आ जिंदगाणी लाख टकां री।।07।।

युगां-युगां री करम कमाई
जग में बेटी बणकर आवै।
आंगण बगिया बीच अलेखूं
रंग-बिरंगा फूल खिलावै।।
बेटी जलम्यां बांगां मारै
अकल सरावां कींकर थारी।
टकै-टकै मत बेच बावळा, आ जिंदगाणी लाख टकां री।।08।।

जलम-जलम तक साथ निभास्यां
कसमां कोल करै सब चोड़ै।
कूड़ा कोल‘र कसमां कूड़ी
सातूं बचन सटाकै तोड़ै।।
दोषारोपण इक-दूजै पर
भावी सुधरै कींकर थारी।
टकै-टकै मत बेच बावळा, आ जिंदगाणी लाख टकां री।।09।।

जिणरो सब कुछ छीन विधाता
दीन-हीन कर डारै।
उण खातर भी दिलड़ो थारो
दया भाव नीं धारै।।
विधना रै बस जगत चराचर
कांई गळती उण विधवा री।
टकै-टकै मत बेच बावळा, आ जिंदगाणी लाख टकां री।।10।।

धारो बदळ्यो ईं दुनियां रो
धक्का खोर हरावळ छाजै।
नियमित काम करणिया निमळा
कामचोर सब सबळा बाजै।।
कूवै भांग पड़ी के करल्यां
च्यारां कानी थारी-म्हारी।
टकै-टकै मत बेच बावळा, आ जिंदगाणी लाख टकां री।।11।।

चालै उणनै ओ चाईजै
मजलां सामी कदम बढावै।
धर कूंचां धर मजलां चालै
हार, जीत नीं मन में ल्यावै।।
पण तूं तो तिकड़म ढूंढण में
खेलण लाग्यो उलटी पारी।
टकै-टकै मत बेच बावळा, आ जिंदगाणी लाख टकां री।।12।।

विश्वगांव री करी कल्पना
सगळो विश्व धिणाप्यो।
देश-विदेशां करै दलाली
धंधो जबर फळाप्यो।।
पण जद हाय लागसी बंदा
राख हुवैली आं रिपियां री।
टकै-टकै मत बेच बावळा, आ जिंदगाणी लाख टकां री।।13।।

बाधादौड़ जियां जिंदगाणी
पग-पग माथै बाधा।
बडा-बडा अण कस्या कसौटी
कृष्ण हुवो या राधा।।
रोयां राज मिलै कद जग में
(अर) बैठ्यां री कद आवै बारी।
टकै-टकै मत बेच बावळा, आ जिंदगाणी लाख टकां री।।14।।

जण-जण आगै रोय रिरायां
मन रो दुखड़ो कद मुरझावै।
अैड़ा लोग ऊपणै ऊभा
उलटी हीन भावना आवै।।
दुख सूळां सूं फाट्यै गाभां
कद लागै सस्तोड़ी कारी।
टकै-टकै मत बेच बावळा, आ जिंदगाणी लाख टकां री।।15।।

कंचन जैड़ी इण काया रै
खोटै करमां दाग लगावै।
दारू गटकै मांस अरोगै
चोरी, जारी नीं सरमावै।।
ऊभा राड़ करै निशिवासर
आछी सीख्या दुनियादारी।
टकै-टकै मत बेच बावळा, आ जिंदगाणी लाख टकां री।।16।।

ईश तणा अवतार देखलै
पीर पैगम्बर जोय भलांई।
नीतिशास्त्र सगळै धरमां रा
मुसलमान अर सिख्ख, इसाई।।
बौद्ध, जैन तक सगळा बरजै
खोटी जग में चोरी-जारी।
टकै-टकै मत बेच बावळा, आ जिंदगाणी लाख टकां री।।17।।

बेटी सूं बढ़कर इण जग में
कोई हित सोचणियों कोनी।
मायड़ सिवा कुमारग जातां
कान पकड़ रोकणियों कोनी।।
मारू कारण माण तिहारो
भूल मती तूं ताकत आंरी।
टकै-टकै मत बेच बावळा, आ जिंदगाणी लाख टकां री।।18।।

अत विश्वास करै तो ऊपर
तूं उण सागै घात करै।
सुख रा दिन जो तनै दिखावै
तूं उण खातर रात करै।।
खोटै करमां घटै कमाई
जीव फंसैलो मोटी घ्यारी।
टकै-टकै मत बेच बावळा, आ जिंदगाणी लाख टकां री।।19।।

नाणूं अैक कमावै नांहीं
खरच करण में सै सूं आगै।
रात ढळ्यां पछ पोढण आवै
तप्यां तावड़ो बिस्तर त्यागै।।
कथणी-करणी नीं क्यां जोगी
कांईं जाण कपूतां धारी।
टकै-टकै मत बेच बावळा, आ जिंदगाणी लाख टकां री।।20।।

मजलां सूं मारग नै मोटो
सायर सगळा कह बतळावै।
सद मारग सूं मजलां पूगै
बां खातर ही ढोल घुरावै।।
सत री राह चालतां संकट
आवै उण सूं मत ना हारी।
टकै-टकै मत बेच बावळा, आ जिंदगाणी लाख टकां री।।21।।

शॉर्टकट री राह सदीनी
सुख देवण में कद सामर्थ।
इयां-बियां अर जिंयां-तियां कर
पद पावण रो कांई अर्थ।।
गेलै-गेलै गांव गयां री
हल्लां-गल्लां ही न्यारी।
टकै-टकै मत बेच बावळा, आ जिंदगाणी लाख टकां री।।22।।

गरभ मांय करवाय परीक्षण
लाडेसर सूं घात करै।
बेटो-बेटी अेक बरोबर
कह-कह मोटी बात करै।।
काळी अै करतूतां थारी
पड़सी इक दिन खुद पर भारी।
टकै-टकै मत बेच बावळा, आ जिंदगाणी लाख टकां री।।23।।

नर-नारी पहिया जग रथ रा
इक दूजै रा पूरक पाक।
नर बिन नार तणी कद जिंदड़ी
नार बिना कद नर री धाक।।
बिगड़ै दशा दिशा भटक्यां सूं
देख भलां तूं दुनियां सारी।
टकै-टकै मत बेच बावळा, आ जिंदगाणी लाख टकां री।।24।।

हळदी री दो गांठ लेयनै
बण्यो पसारी फूल्यो डोलै।
पुटियै दांईं पग ऊँचा कर
आसमान ने अेडी तोलै।।
खुद सूं मोटो खुदा न मानै
अहमजाळ उळझ्योड़ो भारी।
टकै-टकै मत बेच बावळा, आ जिंदगाणी लाख टकां री।।25।।

सेवा खातर है ओ जीवण
सेवा भाव सदा मन राखो।
कर सेवा परमारथ साझो
मीठा भावां रा फळ चाखो।।
पण सेवा किण री अर कींकर
करणी इणरी नहीं बिचारी।
टकै-टकै मत बेच बावळा, आ जिंदगाणी लाख टकां री।।26।।

समय बड़ो सम्राट जगत में
उण सूं लड़नों ओखो।
महाबली अरजण भी उण सूं
धोळै दिन रो खायो धोखो।।
रावण, कंुभ, मेघ सा रुळग्या
जगती में ही धाक जकां री।
टकै-टकै मत बेच बावळा, आ जिंदगाणी लाख टकां री।।27।।

सदा जकी अणबोली रहकर
थारै सितमां नै स्वीकारै।
थारै सुख रै खातर खुद रो
तन, मन, जीवण सगळो वारै।।
वा चाह्वै है प्रीत तिहारी
उण खातर ना धोखो धारी।
टकै-टकै मत बेच बावळा, आ जिंदगाणी लाख टकां री।।28।।

नारी री निष्ठा नै नर तैं
पग-पग माथै परखी।
किती कसौट्यां कसी नार नै
(वा) खरी उतरती हरखी।।
पण जै परख्यो बण एकर तो
पोल खुलैली थां मरदां री।
टकै-टकै मत बेच बावळा, आ जिंदगाणी लाख टकां री।।29।।

ताक-झांक कर जो तैं जाण्यो
उण सच रो मत कर पतियारो।
जिंदगाणी रो सांच अटपटो
जीवण रो नैपथ्य नियारो।।
खुद रै मन में झांक बावळा
आदत सुधरै जिण सूं थारी।
टकै-टकै मत बेच बावळा, आ जिंदगाणी लाख टकां री।।30।।

समय बायरो, छोड़ दायरो
पड़दा फाड़ै, सांच उघाड़ै।
महलां धारी मौन, झौंपडि़यां
सीनूं ताणै, दूंकै, दहाड़ै।।
पोल खुलण रो कद पछतावो
आदत सुधरै नीं महलां री।
टकै-टकै मत बेच बावळा, आ जिंदगाणी लाख टकां री।।31।।

जे जड़ में दीमक लागी तो
सुळियो पेड़ मतै हालैला।
भायां में मतभेद हुयां तो
फरजीड़ा फोड़ा घालैला।।
छोटी-मोटी खींचताण सूं
मत तूं चूकी चाल तिहारी।
टकै-टकै मत बेच बावळा, आ जिंदगाणी लाख टकां री।।32।।

परघर जाकर दुख प्रकाशै
बैर्यां तणों करै विश्वास।
धणिंयां संग रचावै धोखो
ओछा औगणगारा खास।।
वां री नाव डुबै मझधारां
जाण समझ तूं करणी थारी।
टकै-टकै मत बेच बावळा, आ जिंदगाणी लाख टकां री।।33।।

भलां हूंत भलो नंह भाखै
औछां सूं उळझै बिन काम।
चौथै घर में चौधर पाड़ै
राड़ रोपल्यै तीजै गांव।।
घर में हाण जगत में हांसी
राख रुळै टणकाई सारी।
टकै-टकै मत बेच बावळा, आ जिंदगाणी लाख टकां री।।34।।

मिनखपणै रो मोल न जाणै
मिनखां मांहीं फांटा घालै।
(आं) पंडां, मुल्लां, पादरियां री
जीभ सदीनी अंवळी चालै।।
धरम-मरम रा ठेकेदारां
बांधी  पोटां कुकरमां री।
टकै-टकै मत बेच बावळा, आ जिंदगाणी लाख टकां री।।35।।

हिंद चमन री रुखवाळी रो
वादो करनै वोट लेज्यावै।
फूल फंफेड़ै, पत्ता झाड़ै
डाळ्यां तोड़ै, पेड़ हिलावै।।
जनता बोलै, जेळां खोलै
दूजै हाथां द्यै रुखवाळी।
टकै-टकै मत बेच बावळा, आ जिंदगाणी लाख टकां री।।36।।

दुष्टां री दुष्टाई आगै
सगळै सजनां नाड़ पसारी।
दस गादडि़यां करी गरजना
नब्बै सिंघां चुप्पी धारी।।
गादड़ तो गादड़ ही रहसी/ है आखिर
सिंघाई जालै सिंघांरी।
टकै-टकै मत बेच बावळा, आ जिंदगाणी लाख टकां री।।37।।

वीर धरा इण भरत भोम में
सत री जड़ा अणूंती ऊंडी।
हूण, कुसाण, शकां, तुरकां अर
अंगरेजां री निठगी डूंडी।।
तूं मूळी कुणसै क्यारै री
कांई खिमता आं पानां री।
टकै-टकै मत बेच बावळा, आ जिंदगाणी लाख टकां री।।38।।

~~डॉ. गजादान चारण “शक्तिसुत”

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