पितृ हंता नरेश नै मिलण सूं मना करणियो निर्भीक कवि तेजसी बारठ

“गुण पंखी प्रबोध” रा रचयिता केशरीसिंह जैतावत आपरी इण पोथी में चारण भक्त कवेसरां री साधना नै सरावता लिखै-

रांम रिझायो चारणां, वडा वडा कथ वत्त।
पंखियां तणो प्रबोध सुण, केहरि कहै कवत्त।।

यूं तो चारणां में घणा ई भक्त कवि होया है पण चवदै भक्त कवियां रो नामोल्लेख घणो मिलै-

चौरासी रूपग नरहर चवण, वरणत वाणी जू जुवा।
चरण सरण चारण भगत, हरि गायक एता हुवा।।

भक्त नरहरदास बारठ रो नाम ज्यूं चावो है उणी गत इणां रै कौटम्बिक सदस्य तेजसी बारठ टेला रो नाम घणो चावो है।रतनू वीरभाण आपरी पोथी “भागोत पुराण में लिखै है –

संत कवेसर तेजसी, दूजो नरहरदास।
जपियो कल़प मनोज जिण, राधा विष्ण विलास।।

इणी गत एक दूहो घणो चावो है जिणमें प्रसिद्ध कवियां में तेजसी रो उल्लेख होयो है –

अल्लू ईसर आसक्रन, माधो मथुरादास।
टेलै बारठ तेजसी, निज गुण भगत निवास।।

जद म्है छोटो हो जद म्हारा जीसा (दादोसा) गणेशदानजी, तेजसी रो एक भुजंगी छंद पढिया करता हा। बो छंद म्है उतारियो हो पण चौथी रो विद्यार्थी होवण सूं सावल़ नी समझ सकियो अर हमे कोई बतावणियो नी। एक छंद आपरी निजर कर रैयो हूं , जिण में कवि लिखै कै बिनां राम -नाम रै जीवण विरथा है –

कहां वेदवी ध्यान वाचै विचारै।
सतं पुस्तकं पाट टीका सँवारै।
वन्यो भक्ती एतै ***मथ्या वरानं।
ररंकार रामैण रमेती रमानं
पढै तेजसी ऐम साची कथा है।
विनां राम नामं व्रथा है व्रथा है।।

तेजसी भक्त कवि, सत्य वक्ता अर नीतिवान पुरुष हा। बगतसिंह जोधपुर, जयपुर सूं मदत मांगण खातर जावती वेल़ा पुस्कर में पडाव कियो। बगतसिंह रै नेम हो कै सूरज रै दरसण बिनां भोजन नी करता। उण दिनां, दो दिन तक गूघसवाड़ रै कारण सूरज दरसण नी होया अर बगतसिंह आपरो नेम छोडण नै तैयार नी। साथलां निवेदन कियो कै “कन्नै चारणां रो गांव टेलो है अर उठै तेजसी बापजी वडा भक्त है। उणां रा दरसण करर आप भोजन पा लिरावो।” दरबार कैयो, जावो तेजसी नै डेरै ले आवो।

दरबारी जायर कैयो आपनै दरबार याद किया है आप पधारो आपरा दरसण करर दरबार रसोवड़ो अरोगैला। “तेजसी कैयो म्है माल़ा फेर रैयो हूं, म्है नी हाल सकूं । जाय नै दरबार नै आ बात बता दो।” दरबारियां जाय र कैयो कै बापजी माल़ा फेर रैया है बिचै उठै नी।बगतसिंह कैयो कै जावो बापजी नै कैवाड़ो कै दरबार खुद टेलै आपरा दरसण करण आय रैया है। दरबारी गया अर तेजसी नै कैयो कै “दरबार खुद आ रैया है बै आपरा दरसण करणा चावै है।” तेजसी कैयो “दरबार म्हारो मूंडो देखणो चावै! पण म्है दरबार रो मूंडो नी देखणो चावूं!। ऐड़ै पापी री छियाँ ई कांई काम री?” दरबारियां जायर सारी हकीकत बताई। बगतसिंह रीस में झाल़ ब़बाल़ होयर कैयो कै “तेजसी री इतरी हिम्मत! कै म्हारी जमी में वसणो अर म्हारो मूंडो ई बाल़णो! अबार तो म्है जा रैयो हूं पाछो आवतो तेजसी नै देखूंलो।” तेजसी नै लोगां जायर आ बात बताई कै पाछा आवती वेल़ा दरबार आप सूं कैवा काढेला। तेजसी कैयो कै सांवरियै री मर्जी होई तो बगतसिंह रै पाछो आवण रो काम नी पड़ेला। इतिहास साखी है कै बगतसिंह नै उठै ई जैर होयग्यो।

ऐड़ै सत्य माथै अडिग रैवणियै चारण तेजसी नै प्रणाम-

बारठ वो ईसरदास देखपरमेसर बाज्यो जगती में।
कवियो अलू तेजसी बारठहुवा सिरोमण भगती में।

~~गिरधरदान रतनू दासोड़ी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *