आधशगति उमिया माताजी री स्तुति – कवि मुळदानजी तेजमालजी रोहडिया (जामथडा कच्छ)

आधशगति उमिया माताजी री स्तुति कवि मुळदानजी तेजमालजी रोहडिया निवासी जामथडा कच्छ री कही

।।दोहा।।
वाणी देवि जिहां जपों, सरसत रहो सहाय।
निरंजणी जाणी नमो, तुंज रुद्राणी माय।।1

।।छंद – सारसी।।
तुंही रुद्राणी, व्रहमाणी, विश्व जाणी, वज्जरा।
चाळळकनेची, तुं रवेची, डुँगरेची, छप्परा।
विशां भुजाळी, वक्र वाळी, त्रिशूळाळी त्रम्मया।
वेदां वदंती, सारसत्ती, आध शगति उमिया।।1

पृथवी पियाळे, झोम झाळे, व्योम वाळे वादळे।
गर वांस गाळे, जांख जाळे, नदी नाळै निहचळे।
समूह खाळे, मध्ध माळे, जळे काळे जप्पिया।
वेदां वदंती, सारसत्ती, आदि शगति उम्मया।।2

नव नवां रंगे, रंग चंगे, अंग अंगे ओपियं।
पुजे पनंगे, ऐह मंगे, जंग जंगे जोपिअं।
मेरु सुरंगे, मात गंगे, शिव संगे शम्मिया।
वेदां वदंती, सारसत्ती, आध शगति उम्मया।।3

असुराय आकं, मध्ध झाकं, बजे हाकं, बस्समीं।
तरशूळ ताकं, झींक झाकं, भया खाखं भस्समी।
जवनाण जाकं, चडे चाकं, डाक हाकं, डम्मिया।
वेदां वदंती, सारसत्ती, आध शगत्ति उम्मया।।4

असुरां उडंडे, खंड खंडे, व्रहमंडे वज्जया।
प्रमिया पंडे, चडे चंडे, कुतुक मंडे किज्जया।
चुरिया चंडे, चंड मंडे प्राण छंडे, पम्मिया।
वेदां वदंती, सारसत्ती आध शगति उम्मया।।5

अपरम उपाया, करी काया, ब्रह्मजाया वद्दरे।
नव कुळ निपाया, जण जिमाया, शरण आया सध्धरे।
कइ कइ खपाया, कइ दुलाया पुरण माया प्रम्मिया।
वेदां वदंती, सारसत्ती, आध शगति उम्मया।।6

को दरख कारण, मलेच्छ मारण, कज्ज सारण कव्वियां।
विधन विदारण, दुःख दारण, तरण तारण तव्वियां।
मुळवो चारण, तुं उगारण, खरी धारण खम्मिया।
वेदां वदंती, सारसत्ती आध शगति उम्मया।।7

मेसाण मरणे, पीठ झरणे, नेह चरणे नक्किया।
चारणाँ वरणे, पोखण भरणे, तुझ्झ शरणे तक्किया।
कह मूळु करणे, आप शरणे, नित्त चरणे नम्मिया।
वेदां वदंती, सारसत्ती आध शगति उम्मया।।8

~~कवि मुळदानजी तेजमालजी रोहडिया (जामथडा कच्छ)
प्रेषित: नरहरदानजी बाटी।

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