उम्मेदां माजी

उम्मेदां माजी रो पीहर मोटेई(फलोदी)अर दासोड़ी सासरो हो। आप री जात बीठू ही। सांगड़ सूं बीठू आय इण गाव मे बसग्या हा। अठैरे किण ठाकुर इण बीठुवां नै जमी दी ओ ठाह नी है अर नीं ओ ठाह है कै इण बीठुवां रो किण ठाकुर साथै जमी रो विवाद होयो। ओ मोटेई पातावतां री जागीर रो गांव हो। बीठुवां रे किणी खेत नै लेय ठाकुर सूं वाद बढग्यो। ठाकुर रा आदमी आया अर खेत जोत दियो। चारणां घणा ई समझाया पण पार नी पड़ी छेवट बात जमर तक पूगगी। प्रश्न उठियो कै जमर करे कुण? पण जमर री बात किणी सूं पार नी पड़ी। उम्मेदां माजी जापै मे सूता हा। सूतां उणां आ बात सुणी कै ठाकुर खेत माडै बाय रैयो है अर किणी सूं तेलिया कै जमर संझ नी आयो तो उणां नै क्रोध आयग्यो। उणां फटकारतां कैयो कै जावो रे लिपल़ां !पछै थे केड़ा चारण हो। म्है जमर करूंला। ओ म्हारो गीगलो दासोड़ी पूगा दिया। अठै एक पल मत राखिया। ठाकुर अर म्हारो बारियो भेला ई होवेला। घर वाल़ा की सोचता विचारता जितै तो माजी जमर कर दियो। इतिहास साखी है कै रात रा एक बोबाड़ रै साथै उठै रै ठाकुर रो प्राणांत होग्यो। आ बात लगै टगै वि सं १९०० रे आसै पासै री है। आज ई दासोड़ी रा वासी इण गांव नै निनामियो गांव कैवै अर कोई नाम नी लेणो चावै। एकर कोई दासोड़ी रो चारण इण गांव मे गयो परो। ठाकुर उण नै पूगतो सनमान देय तिलक भंगाई अर कैयो कै आप ऐ भल़ै रुपिया ले जावो अर इण पैसां सूं थांरो जीवत खर्च कर र पूरै गाव नै जिमादो ताकि म्हारै रावल़ै मे शांति वापरै। आज री भाषा मे आप कैंई कैयदो पण हकीकत है कै गांव रा एक एक बूढा माजी हा जिणां नै देवीय आभास होयो कै गांव मे अखज (नी खावणजोग) आ रैयो है कोई मत खाया। उण चारण ज्यूं ई गाव मे आय कैयो कै म्है जीवत खर्च करू़ला अर पूरो गांव म्हारै जीमो तो गांव वाल़ा समझग्या कै ओईज अखज है। गांव वाल़ां उणनै धमकायो कै थारै कनै इता रुपिया आया कठै सूं? उण डरतै पूरी बात बता दी। गांव वाल़ां उण नै गांव बारै काढ दियो। बात आज ई चालै कै उण चारण नै कोढ होयगी। बो पाछो मोटेई बुवो गयो ठाकुर उणनै सनमान सूं राखियो। बो चारण उठै ई मरियो। ठाकुर उण रो आदर रे साथै दाग कियो अर ऐढो कियो। आज ई बो खेत अखड़ पड़ियो है। कोई उण खेत नै नी बावै। केईयां नै एलोट होयो पण लोग खेत नै रातो रात तजग्या। की दूहा म्हारै आखरां मे

अई उम्मेदां ईसरी, अरियण दियो उथाप
साच दासोड़ी सासरो, ऊजल़ कीनो आप १

इल़ साखी है आज दिन, तैं राखी रढियाल़
अई उम्मेदां ईसरी, ईहग दिया ऊजाल़ २

वसुधा राखी वीठवण, पीहर रो पखपाल़
किया अमामी काज तैं, भामी विरद वडाल़ ३

पातावत मेटी परी, लोयण छत्र्यां लाज
मोटेई खल़ मारियो, आई कर अगराज ४

रेणव तो चरणां रहै, छती रखै तूं छाप
उथपै कोई आण वो, उणनै देय उथाप ५

आई वरण उजाल़ियो, पख पीहर रो पाल़
रखी उमेदां ईसरी, धर तैं धाबल़याल़ ६

आद रीत पाल़ी इल़ा, जो उजवाल़ी जात
जौहर झाल़ां झूल नै, मही रुखाल़ी मात ७

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