भैरव स्तवन

bhairav

कवि की आवाज में सुनने के लिये यहाँ क्लिक करें

🌺दोहा🌺
तिरभंगी छंदों तवन, नमन भैरवा नाथ।
कथूं जिताडौ कासपत, भव रौ औ भाराथ॥

🌺छंद त्रिभंगी🌺
काशी रा काळा, दीन दयाळा,वीर वडाळा, वपु -बाळा।
कर दंड कराळा, डाक-डमाळा, चम्मर वाळा, खपराळा।
मथ अहि मुगटाळा, ललित लटाळा, घूंघरवाळा, घमां घमा।
खं खेतरपाळा, रह रखवाळा, रूप निराळा, नमां नमां॥1॥

वपु राख रमावै, स्वान सजावै, मोद मनावै, हरखावै।
डमरू डणकावै, नाच नचावै, घन गहरावै, गूंजावै।
बोलै बिरदावै, आफत आवै, कष्ट कपावै, अमां तमां।
खं खेतरपाळा, रह रखवाळा, रूप निराळा, नमां नमां॥2॥

लखनव रे भेळौ, चामँड चेलो, आप अकेलौ, अलबेलो।
तन सिंदुर-तेलो, बहु बबरेलो, जग जबरेलौ, नाचैलो।
किलकार करैलौ, छम छम छैलौ, सबसू प्हैलौ, खमा खमा।
खं खेतरपाळा, रह रखवाळा, रूप निराळा, नमां नमां॥3॥

वपु धर अहि वाळौ, सहस फणाळौ, वळ विखवाळौ, घण काळौ।
नव हथौ निहाळौ, मथ मणियाळौ, मूंछां वाळौ, मतवाळौ।
बावन बबराळौ, बांबी वाळौ, कर किरमाळौ, चलै छमां।
खं खेतरपाळा, रूप निराळा, रह रखवाळा, नमां नमां॥4॥

डमरू डम डम्मा, घूंघर घम्मा, ठोल ढमम्मा, ढम ढम्मा।
बाजै डक बम्मा, झांझ झमम्मा, थणणण थम्मा, थै थम्मा।
छम छम रव छम्मा, पद परिकम्मा, नाच नचम्मा, घणी खमा।
खं खेतरपाळा, रह रखवाळा, रूप निराळा, नमां नमां॥5॥

दारू दाखांळी, लो लाखांळी, कढी कलाळी, तज-वाळी।
एलच लोंगाळी, मँह वरियाळी, दाडम वाळी, गुड -गाळी।
पीवौ भर प्याली, घण गाढाळी, आप कपाली, ले हथमां।
खं खेतरपाळा, रह रखवाळा, रूप निराळा, नमां नमां॥6॥

जीमौ जबरैला, चंडी चेला, सबसूं पैला, फळ- केळा।
चूरमियौ छैला, गुळ घी भेळा, नित नारेळा, हर वेळा।
घण धूप घुपैला, सरस सवेळा, दीप जळैला, सांझ समां।
खं खेतरपाळा, रह रखवाळा, रूप निराळा, नमां नमां॥7॥

म्हानै मांमा रो, सदा सहारौ, अर पतियारौ, बस थारौ।
जड पातक जारौ, आप उगारौ, भव रो भारौ, घण भारौ।
सब संकट टारौ, नरपत वारौ, भैरू म्हारौ, दुःख दमां।
खं खेतरपाळा, रह रखवाळा, रूप निराळा, नमां नमां॥8॥

🌺कलस छप्पय🌺
डमरू डाक डमाल, झांझ डफ ढोलक बाजै।
मादळ-भेरी मृदंग, घणै रव गहरै गाजै।
मंदिर मँह मंजीर, नगारो धुरै निराळो।
खेलै खेतरपाळ, मुदित मांमौ मतवाळौ।
नित नाचै नखराळौ नमन, लांगडियौ लटियाळ औ।
शुभ लाभ करै “नरपत” सदा, विघन विदारणवाळ औ॥
~~वैतालिक

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *